{"remix_data":[],"remix_entry_point":"challenges","source_tags":["local"],"origin":"unknown","total_draw_time":0,"total_draw_actions":0,"layers_used":0,"brushes_used":0,"photos_added":0,"total_editor_actions":{},"tools_used":{"square_fit":1},"is_sticker":false,"edited_since_last_sticker_save":true,"containsFTESticker":false}
देशभर में आदिवासी समाज अब अपने मूल अधिकारों और पहचान की रक्षा के लिए एकजुट होता हुआ नजर आ रहा है। इसी कड़ी में 24 मई को राजधानी दिल्ली में आदिवासी समाज द्वारा महा गर्जना रैली का आयोजन किया जा रहा है। इस रैली में देश के अलग-अलग राज्यों से हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल होंगे। सरगुजा संभाग से भी करीब 5 हजार लोग दिल्ली पहुंचने की तैयारी में हैं।
इस रैली का मुख्य उद्देश्य डीलिस्टिंग की मांग को लेकर केंद्र सरकार तक आदिवासी समाज की आवाज पहुंचाना है। आदिवासी संगठनों का कहना है कि जो लोग आदिवासी समाज से अन्य धर्मों में परिवर्तित हो जाते हैं, उन्हें अनुसूचित जनजाति के आरक्षण और अन्य संवैधानिक सुविधाओं का लाभ नहीं मिलना चाहिए।
समाज के लोगों का तर्क है कि आदिवासी पहचान केवल जातीय नहीं बल्कि सांस्कृतिक और पारंपरिक जीवनशैली से जुड़ी हुई है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति ईसाई, मुस्लिम या अन्य धर्म स्वीकार करता है, तो उसे आदिवासी आरक्षण की श्रेणी से बाहर किया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर दिल्ली में बड़े स्तर पर यह प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है।
आदिवासी समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि यह आंदोलन किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि मूल आदिवासी अधिकारों और संवैधानिक संरक्षण को बचाने की लड़ाई है। रैली के माध्यम से केंद्र सरकार से मांग की जाएगी कि डीलिस्टिंग को लेकर जल्द स्पष्ट नीति बनाई जाए।
दिल्ली में होने वाली इस महा गर्जना रैली को लेकर आदिवासी समाज में भारी उत्साह देखा जा रहा है। गांव-गांव से लोग दिल्ली रवाना हो गए हैं। समाज के नेताओं का दावा है कि यह रैली आदिवासी अधिकारों की लड़ाई में एक बड़ा संदेश होगा।

