अंबिकापुर। शहर का विवादित संदीप त्रिपाठी का दयानिधि हॉस्पिटल एक बार फिर गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में है। इस बार अस्पताल प्रबंधन पर आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज कराने आए मरीज से कथित रूप से 40 हजार रुपये की अवैध वसूली करने का आरोप लगा है। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल उठने लगे हैं।

पीड़ित का आरोप है कि वह आयुष्मान कार्ड के माध्यम से इलाज कराने दयानिधि हॉस्पिटल पहुंचा था। योजना के तहत उपचार का लाभ मिलने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने उससे 40 हजार रुपये जमा कराए। इतना ही नहीं, आरोप है कि यह राशि अस्पताल के आधिकारिक खाते में जमा कराने के बजाय स्टाफ के निजी खाते में ट्रांसफर कराई गई। जब मरीज ने इलाज और दवाइयों का बिल मांगा तो उसे किसी प्रकार का बिल या भुगतान की रसीद उपलब्ध नहीं कराई गई।

अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों और उनके परिजनों ने भी आरोप लगाया कि आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद उनसे अतिरिक्त राशि ली जा रही है, लेकिन भुगतान के बदले कोई वैध बिल नहीं दिया जाता। इन आरोपों ने आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गौरतलब है कि दयानिधि हॉस्पिटल पहले भी आयुष्मान योजना, कथित उपचार संबंधी अनियमितताओं और अन्य विवादों को लेकर चर्चा में रहा है। बावजूद इसके, शिकायतों और मीडिया रिपोर्टों के बाद भी अब तक किसी बड़ी कार्रवाई का अभाव अब अधिकारियों के कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सामाजिक कार्यकर्ता मुकेश गोस्वामी उक्त स्थल पर मौजूद होकर मुख्य चिकित्सक पीएस मार्को को कॉल कर सारे सबूतों के साथ आरोप लगा रहा है तो आखिर शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभाग कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं? क्या मामले की निष्पक्ष जांच होगी या फिर यह प्रकरण भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?


