सरगुजा। अंबिकापुर के डबरापानी में वन भूमि पर बने अवैध कब्जों पर वन विभाग द्वारा की गई कार्रवाई अब सवालों के घेरे में आ गई है। वरिष्ठ पार्षद आलोक दुबे ने डीएफओ अभिषेक जोगावत पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें लापरवाह बताया है।
दरअसल डबरापानी क्षेत्र में वन भूमि पर किए गए अवैध कब्जों के खिलाफ वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए 54 में से करीब 20 मकानों को तोड़ दिया गया हैं। लेकिन इस कार्रवाई के बाद पूर्व पार्षद सतीश बारी ने वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए विभाग को लापरवाह बताया। उन्होंने कहा कि आखिर कब्जा होने तक वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी क्या कर रहे थे।

वरिष्ठ पार्षद आलोक दुबे का आरोप है कि सरगुजा जिले के कई इलाकों में लंबे समय से वन भूमि पर अतिक्रमण हो रहा है, लेकिन विभागीय अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध रही है। उनका कहना है कि जब लोग वन भूमि पर कब्जा कर मकान बना रहे थे, तब न तो बिट गार्ड और न ही वन विभाग के किसी अधिकारी ने समय रहते कार्रवाई की। कब्जा पूरा होने और परिवारों के बस जाने के बाद अचानक अमला लेकर मकान तोड़ने पहुंचना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

आलोक दुबे ने यह भी आरोप लगाया कि अंबिकापुर में 157 परिवारों को 29 मार्च को ही बेदखली का नोटिस जारी कर दिया गया था। इसके बावजूद डीएफओ अभिषेक जोगावत ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और ना ही कार्रवाई के लिए फोर्स की मांग की गई थी। यही वजह रही कि बाकी कब्जाधियो ने हाईकोर्ट से 60 दिनों का स्टे ऑर्डर ले आया हैं। लेकिन वन अधिकार पत्र के अनुसार सामान्य जाति को 75 साल और आदिवासियों को 30 साल से काबिज होने या निवासरत अनिवार्य आधार माना गया हैं।
इस पूरे मामले को लेकर सरगुजा डीएफओ अभिषेक जोगवत से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन रिसीव नही किया। ऐसे में अब डबरापानी की कार्रवाई के बाद पूरे मामले में वन विभाग की कार्यशैली और अधिकारियों की जिम्मेदारी को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

गौरतलब हैं कि अगर सरकारी तंत्र ही गैर जिम्मेदाराना हो तो सवाल उठना लाजिमी हो जाता है। अधिकारी अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से निभाते तो ऐसी परिस्थिति देखने को कभी नहीं मिलती। लेकिन अवैध कब्जाधारियों को आश्वासन देने वाले जमीन दलालों और वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों ने अब मुसीबत में डाल दिया है। अब देखना होगा कि 60 दिनों बाद बाकी बचे मकान पर अवैध अतिक्रमण की कार्रवाई होती है या नहीं, यह तो आने वाला वक्त बताएगा।

