अंबिकापुर: सरगुजा के नए पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल के सख्त निर्देश के बाद क्रिकेट सटोरियों के रसूख और पैसे के आगे पस्त पड़ी कोतवाली पुलिस ने सटोरियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया है। उत्तरी छत्तीसगढ़ के नामी क्रिकेट सटोरी अंबिकापुर निवासी “दीप सिन्हा” और “अमित मिश्रा उर्फ पहलू ” का जड़ खोदने की तैयारी सरगुजा पुलिस ने शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक दीप सिन्हा और अमित मिश्रा के खिलाफ आर्थिक रूप से स्ट्राइक करने की भी तैयारी है। बताया जा रहा है कि इन दोनों साटोरियों का नाम महादेव सट्टा से भी जुड़ा है। बीते कुछ वर्षो में ऑनलाइन सट्टा किंग दीप सिंन्हा और अमित मिश्रा ने मिलकर सट्टा के जरिये अरबों रुपये की बेहिसाब संपत्ति अर्जित की है। ऐसे में इंटेलिजेंस विभाग की नजर भी इन दोनों सटोरियों और इनसे जुड़े लोगों पर बनी हुई है।
इसी कड़ी में ऑनलाइन सट्टेबाजी में रकम लेन-देन के लिए फर्जी बैंक खाता खोलने वाला एक और सटोरिया पुलिस के हत्थे चढ़ा है। आरोपी रितिक मंदिलवार उर्फ बमफोड़ (24 वर्ष, निवासी जोड़ा तालाब, सत्तीपारा, अंबिकापुर) को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी ने कई लोगों के आधार कार्ड का दुरुपयोग कर फर्जी बैंक खाते खुलवाए और इसका इस्तेमाल सट्टेबाजी में किया। पुलिस ने इसके कब्जे से केनरा बैंक का खाता ओपनिंग फॉर्म भी जब्त किया है।

पुलिस के हत्थे चढ़े सटोरिया ने खुलासा किया है कि सट्टा के रकम के लेनदेन के लिए दीप सिन्हा और अमित मिश्रा ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर हजारों की संख्या में फर्जी तरीके से भोलेभाले लोगों को जाल में फंसाकर बैंक खाता खुलवाया है। यही नही सटोरी गैंग का मास्टरमाइंड दीप सिन्हा उत्तरी छत्तीसगढ़ में सक्रिय साटोरियों को महादेव ऐप सहित तमाम ऑनलाइन सट्टा लिंक उपलब्ध कराया करता है।
ये है घटनाक्रम
पुलिस को 13 मई 2024 को मुखबिर से सूचना मिली थी कि आयुष सिन्हा उर्फ दीप सिन्हा, अमित मिश्रा उर्फ पहलू और शुभम केशरी स्काईएक्सचेंज लिंक के जरिए IPL मैच (गुजरात टाइटंस बनाम कोलकाता नाइट राइडर्स) पर ऑनलाइन सट्टेबाजी का कारोबार चला रहे है। त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार किया था। उनके कब्जे से 19 मोबाइल, 3 पासबुक, 2 चेकबुक, 21 एटीएम कार्ड, 20,100 रुपये नकद और अन्य दस्तावेज जब्त किए गए थे। इस मामले में अपराध क्रमांक 325/24 के तहत छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम की धारा 7, 8 के तहत कार्रवाई की गई थी। तीनों आरोपी वर्तमान में जमानत पर हैं।

सट्टे की रकम की लेनदेन के लिए फर्जी बैंक खाता
आगे की जांच में पुलिस ने जब्त एटीएम और खाताधारकों की जानकारी बैंक से मांगी। जांच में पता चला कि केनरा बैंक के खाताधारक आभास पासवान (22 वर्ष, निवासी दर्रीपारा, अंबिकापुर) ने कभी खाता नहीं खुलवाया था। आभास ने बताया कि उसने 2023 में अपना आधार कार्ड रितिक मंदिलवार को दिया था। रितिक ने बिना आभास की जानकारी के उसका आधार कार्ड इस्तेमाल कर केनरा बैंक में खाता खुलवाया और उसे सट्टेबाजी के लिए अमित मिश्रा उर्फ पहलू को सौंप दिया। रितिक ने 14-15 अन्य लोगों के आधार कार्ड से भी फर्जी खाते खुलवाए और कमीशन के रूप में अपने यूनियन बैंक खाते में रकम ली। पुलिस ने रितिक मंदिलवार को धारा 91 जा.फौ. के तहत नोटिस जारी कर तलब किया। पूछताछ में उसने अपराध कबूल किया। उसके खिलाफ धारा 467, 468, 471, 120 बी भा.द.वि. जोड़ी गई। रितिक को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया है।
छत्तीसगढ़ में सट्टेबाजी का बड़ा नेटवर्क सरगुजा से संचालित
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि इन आरोपियों ने सट्टेबाजी से अरबों रुपये की संपत्ति अर्जित की है। इनका कनेक्शन महादेव सट्टा ऐप से भी जुड़ा है। वर्तमान में ये आरोपी अंबिकापुर छोड़कर अन्य राज्यों से क्रिकेट सट्टा का कारोबार संचालित रहे हैं। ऐसे में ये सभी स्टोरी पुलिस के चंगुल से बाहर है। गौरतलब है कि मुख्य आरोपी अमित मिश्रा उर्फ पहलू पहले भी सट्टेबाजी के मामले में शामिल रहा लेकिन पैसे के दम पर वह पुलिस से बचता रहा है।

बेनामी संपत्ति की जांच कब?
सरगुजा में सक्रिय इन साटोरियों का नेटवर्क अब दुबई तक फैल गया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस साटोरियों के द्वारा क्रिकेट सट्टा के काले कारोबार से बेहिसाब दौलत अर्जित की गई है। जिसका हिसाब करने में पुलिस के भी पसीने छूट जायेंगे। पुलिस विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी की का कहना है कि इन सटोरियों के कमर तोड़ने की तैयारी की जा रही है। काली कमाई से अर्जीत की गई संपत्ति का ब्यौरा पुलिस जुटा रही है। इसके बाद इन साटोरियों को पुलिस जड़ से साफ करेगा। हालांकि अब देखने वाली बात है कि इन साटोरियों के संपत्ति की जांच कबतक शुरू होती है।

