बिहार में चल रही मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया इन दिनों विवादों में घिरती नजर आ रही है। इस प्रक्रिया में सामने आई गड़बड़ियों को उजागर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम पर एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद अब राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग ने इस मामले में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए इस पूरी कवायद को “बिना तैयारी, पारदर्शिता और ज़मीनी समझ के की गई” बताया है। पार्टी ने कहा है कि पत्रकार द्वारा उजागर की गई खामियों की बजाय रिपोर्टिंग करने वाले पर कार्रवाई करना एक निंदनीय कदम है।
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश महासचिव परवेज आलम गांधी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि यह मामला न सिर्फ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर चोट है, बल्कि संवैधानिक संस्थानों की विश्वसनीयता को भी गहरा नुकसान पहुंचाता है।
उन्होंने यह भी मांग की कि अजीत अंजुम पर दर्ज मामला तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए, उनकी रिपोर्ट में सामने आई खामियों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो तथा मतदाता सूची में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ।
परवेज आलम गांधी ने चेताया कि यदि संवैधानिक संस्थाएं आलोचना को दबाने का प्रयास करेंगी, तो लोकतंत्र की आत्मा आहत होगी। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से आत्मचिंतन करने और अपने निर्णयों की समीक्षा की अपील की है।

