अंबिकापुर। शहर के डी.सी. रोड स्थित 96 डिसमिल भूमि को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्वर्गीय लक्ष्मी बाई के उत्तराधिकारियों ने खुद को पत्रकार बताने वाले गणेश सिंह पर अवैध तरीके से जमीन पर दावा करने, गाड़ी खड़ी कर विवाद उत्पन्न करने और गाली-गलौज कर भय का माहौल बनाने का आरोप लगा है।

मामला खसरा क्रमांक 4777/1 की भूमि से जुड़ा है। आवेदकों के अनुसार उक्त भूमि स्व. लक्ष्मी बाई के स्वामित्व एवं आधिपत्य में थी। इस संबंध में माननीय तृतीय व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-2 द्वारा व्यवहार वाद क्रमांक 249ए/1990 बृजभान सिंह बनाम हनुमान सिंह में 17 मई 1996 को पारित आदेश में लक्ष्मी बाई के तीन उत्तराधिकारी — बृजभान सिंह, स्व. विक्रम सिंह और गीता सिंह — को वैध उत्तराधिकारी माना गया था। बाद में माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर ने भी सेकंड अपील क्रमांक SA No.151/2003 में निचली अदालत के आदेश को यथावत रखा।
आवेदक का कहना है कि न्यायालय के आदेश में जिन पांच बख्शीश नामों का उल्लेख है, उनमें सभी बख्शीशग्राही काबिज हैं। शेष भूमि पर गणेश सिंह द्वारा लगातार विवाद की स्थिति निर्मित की जा रही है। आरोप है कि गणेश सिंह खुद को “नवोदय छत्तीसगढ़” का पत्रकार बताकर दबाव बनाते हैं और निजी भूमि को आम रास्ता बताकर कब्जे की कोशिश कर रहे हैं।

आवेदक निशांत सिंह उर्फ गोल्डी ने यह भी दावा किया कि लक्ष्मी बाई ने 27 दिसंबर 1989 को वसीयत के माध्यम से विवादित भूखंड अपनी पुत्री गीता सिंह एवं दुर्गा सिंह के नाम किया था। वहीं हनुमान सिंह द्वारा प्रस्तुत 3 मार्च 1987 की वसीयत को नजूल अधिकारी अंबिकापुर ने व्यवहार वाद क्रमांक 162/31-06/2019-20 में 3 मार्च 2020 को अस्वीकार कर दिया था। इसके अलावा आयुक्त सरगुजा संभाग अंबिकापुर ने भी 17 मार्च 2025 के आदेश में उक्त वसीयत को अमान्य करार दिया।
आवेदक का कहना है कि गणेश सिंह ने आज तक किसी सक्षम न्यायालय में अपने पक्ष में किसी वैध वसीयत को लेकर कोई दावा प्रस्तुत नहीं किया है। इसके बावजूद वे जमीन को रास्ता बताकर प्रचारित कर रहे हैं और विवाद कर रहे हैं। आवेदक ने जिला प्रशासन से गणेश सिंह के खिलाफ उचित कार्रवाई करने और सुरक्षा प्रदान करने की मांग करते हुए कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई गई हैं।

