जगदलपुर। छत्तीसगढ़ में जगदलपुर के शहीद गुंडाधुर वार्ड में न्याय की उम्मीदें एक लोहे के ताले में कैद होकर रह गई हैं। करीब 45 वर्षों से जोरीपारा की मिट्टी में अपना आशियाना संजोने वाली 55 वर्षीय विधवा बालो कश्यप आज अपनी पांच बेटियों के साथ दर-दर भटकने को मजबूर है। आरोप है कि स्थानीय पार्षद गायत्री बघेल ने महिला के घर के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया है, जिससे न केवल घर का निर्माण रुक गया है, बल्कि एक परिवार का अस्तित्व भी संकट में पड़ गया है।
मेहनत-मजदूरी कर जीवन बसर करने वाली बालो कश्यप ने नगर निगम से विधिवत अनुमति लेकर अपने जर्जर कच्चे मकान की जगह पक्का निर्माण शुरू कराया था, लेकिन सत्ता और रसूख के रस्साकशी के बीच उनका सपना अब मलबे और विवादों में दबा नजर आ रहा है। हैरानी की बात यह है कि 23 अप्रैल को बोधघाट थाने में शिकायत दर्ज होने और नगर निगम आयुक्त से लेकर तहसीलदार तक गुहार लगाने के बावजूद प्रशासन मौन साधे बैठा है।
मोहल्लेवासियों के हस्ताक्षर युक्त समर्थन यह गवाही दे रहे हैं कि महिला दशकों से वहीं रह रही है, फिर भी एक जनप्रतिनिधि द्वारा दोबारा ताला लगा देना और प्रशासन का कोई ठोस कदम न उठाना, व्यवस्था की संवेदनहीनता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है। सरकारी आवास योजनाओं के बड़े-बड़े दावों के बीच, जगदलपुर की यह सड़क पर आती तस्वीर किसी त्रासदी से कम नहीं है।

