“सुशासन” के दावों पर सवाल 90 साल की बुजुर्ग मां को पीठ पर ढोने वाली बहू आज भी कच्चे घर में रहने को मजबूर
अम्बिकापुर। एक तरफ सरकार “सुशासन तिहार” में प्रधानमंत्री आवास योजना की सफलता की कहानियां गिना रही है, तो दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक बेहद मार्मिक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एक महिला अपनी 90 वर्षीय बुजुर्ग सास को पीठ पर लादकर करीब 5 किलोमीटर दूर पेंशन का पैसा निकालने ले जाती दिखाई दी।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस परिवार की बेबसी पूरे प्रदेश ने देखी, उस परिवार को आज तक प्रधानमंत्री आवास योजना का पूरा लाभ तक नहीं मिल पाया। जानकारी के मुताबिक बुजुर्ग महिला के बेटे के नाम पर पीएम आवास स्वीकृत हुआ था, लेकिन घर के पास बने नाले में डूबने से उसकी मौत हो गई। बेटे की मौत के बाद आवास निर्माण अधूरा ही रह गया और परिवार आज भी जंगल के बीच बने जर्जर कच्चे मकान में रहने को मजबूर है।
बरसात में टपकती छत, चारों तरफ डर और बदहाल जिंदगी… यही उस परिवार की हकीकत है, जबकि दूसरी ओर सरकारी मंचों से “सपनों का पक्का घर” और “सुशासन” के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं।
अब सवाल यही उठ रहा है कि जब एक बुजुर्ग महिला और उसका परिवार आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है, तो आखिर “सुशासन तिहार” का असली फायदा किसे मिल रहा है?

