आयुष्मान भारत योजना गरीब और मध्यम परिवारों के लिए वरदान से काम नहीं है। लेकिन जिले के निजी अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना के नाम पर स्वस्थ लोगों को बीमार बताकर करोड़ो रुपए आयुष्मान कार्ड से निकाला जा रहा है। इसकी भनक अस्पताल प्रबंधन के अलावा किसी को नहीं है।

अंबिकापुर शहर के बनारस रोड स्थित एचआर अस्पताल के नाम से रजिस्ट्रेशन वाला अस्पताल डॉ गोयल के नाम से संचालित किया जा रहा हैं। जहाँ फर्जी डॉ गोयल अस्पताल के नाम से संचालित अस्पताल में इलाज से ज्यादा कारोबार किया जा रहा है। इस रैकेट में अस्पताल के एजेंट गांव-गांव से लोगों को अस्पताल लाते है। उनसे आधार कार्ड नंबर लिया जाता है, थंब इम्प्रेशन लिया जाता है, फिर बेड पर लेटाकर उनकी तस्वीर खींच ली जाती है, और फिर आयुष्मान कार्ड से इलाज का फर्जी क्लेम उठाकर मोटी रकम निकाला जा रहा है। इधर अस्पताल प्रबंधन के द्वारा स्वस्थ लोगों को भी बीमार बताकर, बेड पर लिटाकर इलाज दिखा दिया जाता है। वही एजेंट सिर्फ लालच नहीं देते, बल्कि विरोध करने वालों को धमकी भी दी जाती हैं। लेकिन ये सब स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे चल रहा है, और स्वास्थ विभाग को इस फर्जीवाड़े की भनक तक नहीं है, या फिर सबकुछ जानकर भी अनजान बने बैठे हुए हैं।


इस मामले को लेकर जब आयुष्मान कार्ड के नोडल अधिकारी से सवाल किया गया तो नोडल अधिकारी ने और बड़ा चौंकाने वाला खुलासा कर दिया हैं। उन्होंने कहा कि डॉ गोयल अस्पताल के नाम से कोई अस्पताल रजिस्टर्ड नहीं है। जहा बताया जा रहा है वहाँ स्वास्थ्य विभाग के लिस्ट में एचआर अस्पताल संचालित है। लेकिन इस पूरे मामले में जांच के बाद ही कार्यवाही की बात कही है।

अस्पताल प्रबंधन से आयुष्मान योजना की जानकारी जानने का प्रयास किया गया,तो उन्होंने साफ तौर पर इस पूरे मामले को लेकर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। वहीं इनके बयान नहीं देने से ही यह पूरा मामला साफ हो जाता है कि इस आयुष्मान योजना के तहत किस तरीके से गरीब और मध्यम परिवारों को लूटा जा रहा है।

गौरतलब हैं कि प्रदेशभर के निजी अस्पताल 1 अगस्त से आयुष्मान योजना के रुके पैसे के भुगतान नहीं करने पर इलाज बंद करने बात कही है। दूसरी तरफ इन्हीं अस्पतालों में आयुष्मान योजना को लूट का अड्डा बना दिया गया है।

