अंबिकापुर: विधायक राजेश अग्रवाल ने भूपेश सरकार के डिप्टी सीएम टीएस सिंह देव को हराकर चुनाव जीता है। कहा जाए तो दिग्गज को हराकर वह दिग्गज बन गए है। लेकिन विधायक बनने के बाद उनके कारनामे उन्हीं की पार्टी के नेता पचा नहीं पा रहे हैं। मौजूदा मामला एक वायरल लेटर का है। जिसमें उन्होंने एक चर्चित और बदनाम वकील वकील को पद्मश्री जैसे बड़े और हम सम्मान देने की अनुशंसा कर दी है।
विधायक बनते ही कारनामा शुरू
राजेश अग्रवाल विधायक बने तो ये लगा टीएस सिंह देव के उस कार्यकाल का अंत हो जाएगा। जिसमें 10 साल सत्ता नहीं होने का बहाना और 5 साल अपनी ही सरकार में अस्तित्व की लड़ाई का दिखावा किया गया। लेकिन राजेश अग्रवाल के विधायक बनते ही भाजपा राज में भी कांग्रेस राज का उदय हो गया। कांग्रेस जमाने में उत्पात मचाने वाले और टीएस सिंह देव के करीबी अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण प्रभार और पदस्थापना दिलवाने में विधायक राजेश अग्रवाल ने महती भूमिका निभाई।
पद्मश्री की अनुशंसा ने सबको चौंकाया
विधायक के मंत्री बनने की चर्चा के बीच विधायक की अनुशंसा वाले एक लेटर अचानक सोशल मीडिया में वायरल हो गया है। जबकि जानकारी के मुताबिक वो लेटर विधायक, वकील और उसके पीए के अलावा किसी के पास नहीं था। दअरसल अंबिकापुर के बड़बोले विधायक राजेश अग्रवाल ने शहर के एक आरटीआई कार्यकर्ता कम वकील को गोपनीय रूप से पद्मश्री देने की अनुशंसा कर दी। जिसकी जानकारी ना ही बीजेपी संगठन को थी और ना ही सरकार के किसी नुमाइंदे को थी। इधर इस लेटर के वायरल होते ही उन लोगों ने विधायक के खिलाफ नाराजगी जाहिर की, जो या तो वकील के RTI गतिविधियों के शिकार हो चुके है, या फिर वो जो शिकार होने की फेहरिस्त में शामिल हैं।

वकालत नहीं RTI असल पेशा..
कहते है गंदा है पर धंधा है, इसीलिए वकालत में मिलने वाले रुपयों से कम कमाई होने पर वकील साहब ने RTI का धंधा शुरू कर दिया। ये धंधा इतना फला-फूला कि डीसी रोड में रहकर गांधी चौक में टाइपिंग करने वाले वकील साहब ने चंद सालों में ही बनारस रोड में एक बेशकीमती जमीन खरीदी, और उसमें तीन मंजिला आलीशान मकान, हॉस्टल और शोरूम तक बना लिया। उसके बाद उन्होंने RTI की बदौलत अंबिकापुर के तुर्रापनी इलाके में 22 डिसमिल कीमती जमीन खरीदी। जिसमें किराए का मकान बनाया। वकील साहब के जनहित के कार्य पिछले कई वर्षों से लगातार जारी हैं। इस कड़ी में उन्होंने मैनपाट के एक एकड़ जमीन पर अमीरों के लिए खर्चीला रिसॉर्ट भी बना लिया है। इसके अलावा बिलासपुर में जनहित याचिका लगाने जाने के लिए वहां भी एक घर खरीद लिया है, और ये जनहित में ये सिलसिला लगातार जारी है।

रुपयों में मिलता है अवार्ड
सोशल मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक पर अपने भी कई बार एड देखा होगा। जिसमें PHD की उपाधि और विभिन्न क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले लोगों को किसी सेलिब्रिटी के हाथों सम्मानित कराने का विज्ञापन आता है। जिसको क्लिक करने पर अपना नाम, नंबर और और अपने कार्यक्षेत्र का ब्यौरा भरना होता है। जिसको सबमिट करने के कुछ देर में एक कॉल आता है। जिसमें इस अवॉर्ड का महिमामंडन किया जाता है, और फिर 1 लाख से लेकर कंसेशन रेट में 30 हजार में आपको अवॉर्ड देने का सौदा होता है। ऐसे कई एड आपको फेसबुक में मिल जाएंगे। जिससे आप भी अवॉर्ड ले सकते हैं, और नाम के आगे डॉक्टर लिखने वाली नकली PHD की डिग्री भी ले सकते है।




खरीदे अवॉर्ड के आधार पर मिलेगा पद्मश्री..?
अब आप सोचिए रुपया देकर अवॉर्ड पाने के बाद शहर में होर्डिंग लगाकर खुद अपना महिमामंडन करने वाले वकील साहब को लग रहा है, कि ऐसा अवॉर्ड पाने के बाद शहर की जनता उनके कारनामों को भूल जाएगी। उनको ये भी लगता है कि ऐसे अवॉर्ड को अपने बायोडाटा में मैंनेशन करने से उनको पद्मश्री जैसा महा सम्मानित अवॉर्ड मिल जाएगा। इतना ही नहीं वकील साहब को लगता है कि RTI से कमाई दूसरे दर्जे की कमाई से पहले दर्जे का इतना बड़ा सम्मान उनको मिल जाए, और यही वजह है कि RTI के सहारे विधायक का हर संभव मदद का आश्वासन देकर , वकील साहब ने एक ऐसी अनुशंसा करवा ली। जिसका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भुगतान विधायक को भुगतना पड़ेगा।

बीजेपी नेता और वकील नाराज़
RTI कार्यकर्ता कम वकील साहब काफी हिम्मत वाले हैं। उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत ग्राम सचिव से मुख्य सचिव और सरपंच से लेकर प्रधानमंत्री किसी को नहीं छोड़ा है। सबको अपने आगोश में लपेटा है, और रस चूस के छोड़ दिया है। वकील साहब ने बीजेपी राज में ही गृहमंत्री और उनके पुत्र से पंगा लिया। बहुत पुलिस ,कोर्ट हुआ। फिर ना जाने क्या हुआ मामला शांत हो गया। ऐसा ही तब हुआ जब बीजेपी के एक नेता के ठेकेदारी काम में साहब ने RTI लगाया और फिर मामला बिना नतीजा शांत हो गया। बीजेपी के ऐसे सैकड़ों नेता होंगे, जो वकील साहब की RTI के शिकार हुए है। कुछ कांग्रेस के भी शामिल है। लेकिन उसके बाद भी बड़बोले विधायक की इस अनुशंसा से बहुत से बीजेपी नेता भी नाराज़ है। जिसका परिणाम विधायक को चुकाना पड़ सकता है।
अडानी के खिलाफ जनहित याचिका
RTI वाले वकील साहब एक समय स्थानीय पत्रकारों की मदद से अडानी के खिलाफ बहुत से तथ्य इकट्ठा कर चुके थे। जिसके बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस लेकर अडानी के खिलाफ जनहित याचिका लगाने की बात कही थी। अखबारों में छपा टीवी में चला। लेकिन अब तक ये पता नहीं कि अडानी के खिलाफ जारी वकील साहब का आंदोलन कहां धराशाई हो गया। इसके अलावा भिलाई के बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज को भी साहब ने पहले निशाना बनाया उसके बाद परिणाम बेनतीजा निकला। अरे साहब की कहानी पर किताब भी लिखा जाए तो पेज अनगिनत हो जाएंगे। सरगुजा संभाग का शायद ही कोई विभाग या कोई अधिकारी होगा जो RTI के प्रकोप से नहीं बचा है। लेकिन हजारों RTI लगने वाले साहब ने सैकड़ों खुलासे भी नहीं किए। मतलब आप हम सब समझ सकते हैं। ऐसे में अब इन्हें कौन सा अवॉर्ड मिलना चाहिए आप ही बताइए..?


पत्रकार सबसे बड़े हथियार
RTI कार्यकर्ता कम वकील साहब पहले RTI लगाते हैं। फिर मांडवली करते हैं। मामल अंडर पॉकेट आ गया तो ठीक है। नहीं आया तो फिर साहब एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करके उसका खुलासा कर देते हैं, और पत्रकार उसे अपने-अपने अखबार में विशेष स्थान देते हैं। इससे पत्रकारों को भी अखबार भरने के लिए समाचार मिल जाता है, और साहब को अखबार की वो कटिंग मिल जाती है, जो अगले किसी मामले में होने वाली मांडवली की कठिनाई को दूर कर देती है, क्योंकि साहब उसे हर माध्यम में वायरल करते है, और भ्रष्टाचारी अधिकारी उस कटिंग को देखकर या तो वकील साहब से सेटिंग बना लेते है, या फिर फसने के बाद कटते हैं।

खैर विधायक की अनुशंसा कितनी रंग लाएगी। ऊंट किस करवट बैठता है, ये भविष्य के गर्त में है। पर विधायक जी आपका अपनी ही पार्टी में क्या होगा..? जब ये समाचार आपके संगठन के जिम्मेदार के पास पहुंचेगा..?नोट- अब हम तीसरे एपिसोड में बताएंगे कि शहर में कौन- कौन से खुलासे अधूरे रह गए हैं।

