सरगुजा। जिले के सीतापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खड़ादोरना में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई कर अवैध कब्जा हटाने की मांग की थी। लेकिन कार्रवाई को लेकर अब प्रशासन की निष्पक्षता पर ही सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में भेदभाव किया गया, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है।

जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत खड़ादोरना के खसरा क्रमांक 404/1 की शासकीय भूमि पर कथित रूप से अवैध कब्जा किया गया है। इसी भूमि पर आंगनबाड़ी केंद्र, माध्यमिक शाला और पंचायत भवन संचालित हैं। पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप है कि आंगनबाड़ी भवन से लगे क्षेत्र में सरना तालाब होने के कारण जहरीले सांप निकलने की घटनाएं बढ़ गई हैं। जिससे छोटे बच्चों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच और सचिव द्वारा कई बार मौखिक एवं लिखित रूप से कब्जाधारियों को अतिक्रमण हटाने के लिए कहा गया। लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
शिकायत के आधार पर मामले को लेकर तहसीलदार न्यायालय सीतापुर में प्रकरण दर्ज किया गया था। तहसीलदार कार्यालय से जारी पत्र क्रमांक 203/तह./वाचक-1/2026, दिनांक 10 फरवरी 2026 के तहत आंगनबाड़ी और मिडिल स्कूल परिसर में किए गए बेजा कब्जे को हटाने के लिए संबंधित लोगों को नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद ग्राम सभा की बैठक में सर्वसम्मति से 18 मई 2026 को अतिक्रमण हटाने की तिथि तय की गई। प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए राजस्व अमला और पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई भी की।

हालांकि अब इस कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि 17 अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित थी। लेकिन सीतापुर तहसीलदार द्वारा कथित रूप से भेदभाव करते हुए कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से जुड़े लोगों के मकानों पर कार्रवाई की गई, जबकि अन्य अतिक्रमणकारियों पर दो दिन से अधिक समय बीतने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई है।
इसे लेकर ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाना है, तो कार्रवाई सभी पर समान रूप से होनी चाहिए। अब देखना होगा कि स्थानीय प्रशासन आगे किस तरह से कार्रवाई करेगी।

