अंबिकापुर। ग्राहकों के हितों की रक्षा करने और उन्हें आर्थिक सहयोग देने का दावा करने वाला सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया आज भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से घिर गया है। रीजनल मैनेजर शरणधीर सिंह और शाखा प्रबंधक प्रियेश गौतम पर रिश्वत मांगने और बैंक गारंटी (BG) जारी करने के बदले कमीशन वसूलने के आरोप लगे हैं। यही कारण रहा कि कभी ऑल इंडिया टॉप रैंकिंग 3 में रहने वाला नमनाकला रिंग रोड स्थित सेंट्रल बैंक अब इन दोनों अधिकारियों ने आज 94वें पायदान पर ला कर खड़ा कर दिया है।
बड़े कारोबारियों से बैंक गारंटी के नाम पर धोखा!
बैंक का यह खेल छोटे-मोटे कारोबारियों के लिए ही नहीं, बल्कि बड़े उद्योगपतियों के लिए भी भारी पड़ रहा है। इसका जीता-जागता उदाहरण “श्याम एग्रो” के राइस मिल संचालक जयशंकर साहू हैं।जयशंकर साहू को 2022-23 में कस्टम मिलिंग के लिए 24 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी दी गई थी, ताकि वे अपना कारोबार बढ़ा सकें। लेकिन जब धान उठाव का समय आया, तो सेंट्रल बैंक ने उनकी बैंक गारंटी रिलीज नहीं की। जबकि सेंट्रल बैंक में प्रोपर्टी मॉर्गेज के साथ बैंक चार्ज भी लिया गया था। बावजूद इसके बैंक गारंटी रिलीज नही की गई। इस वजह से न तो धान खरीदी केंद्र से धान उठाया जा सका, और न ही संग्रहण केंद्र से स्टॉक लिया जा सका। इससे उनका पूरा कारोबार ठप पड़ गया, और वे बैंक से लिया गया लोन भी नहीं चुका सके।
अब नीलामी की धमकी!
लोन चुकाने में असमर्थ होने के कारण अब बैंक गिरवी रखी संपत्ति को नीलाम करने पर आमादा है, और इसके लिए तारीख भी तय कर दी गई है और बैंक के अधिकारी भू माफियाओं की तरह अब मॉर्गेज रखे प्रोपर्टी को बेचने के लिए खरीददार ढूंढ रहे हैं।
बैंक प्रबंधन झाड़ा अपना पल्ला
इस पूरे मामले को लेकर बैंक प्रबंधन के अधिकारी शरणधीर सिंह ने कहा कि इस मामले में मैं कुछ नहीं बोलूंगा और जो भी जवाब देना होगा वह कलेक्टर के सामने दूंगा। मीडिया ट्रायल नही चाहता हूँ।
बैंकिंग सेक्टर में कमीशन का खेल!
यह मामला सिर्फ जयशंकर साहू तक सीमित नहीं है। आरोप है कि बैंक गारंटी जारी करने के नाम पर कमीशन लिया जा रहा है, और जो कमीशन नहीं देता, उसकी गारंटी जारी नहीं की जाती। इस तरह की गतिविधियों ने व्यापारियों और उद्योगपतियों के लिए एक नई परेशानी खड़ी कर दी है। अब सवाल उठता है कि:
क्या भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ऐसे भ्रष्ट बैंक अधिकारियों पर कार्रवाई करेगा?
क्या जिला प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच करेगा?
आने वाला वक्त बताएगा कि बैंकिंग सेक्टर में चल रहे इस “कमीशन खेल” पर लगाम लगती है या नहीं।

