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अंबिकापुर। शहर के पीजी कॉलेज में बीए प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रही एक छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद मामला गरमा गया है। छात्रा ने अपने घर के बाथरूम में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद परिवार में मातम पसर गया, लेकिन अब इस मामले ने गंभीर आरोपों का रूप ले लिया है। मृतका के परिजनों ने एनएसयूआई छात्र नेता ज्ञान तिवारी पर छात्रा को लंबे समय से कथित तौर पर प्रताड़ित करने और ब्लैकमेल करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

परिजनों का आरोप है कि छात्रा किसी दबाव या मानसिक प्रताड़ना से गुजर रही थी। हालांकि, उसने इस संबंध में कभी अपने परिवार को कोई जानकारी नहीं दी। छात्रा की मौत के बाद उसके दोस्तों से हुई बातचीत में कथित प्रताड़ना से जुड़ी जानकारी सामने आने का परिवार ने दावा किया है। इसके बाद परिजनों ने गांधीनगर थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

छात्रा की मौत के बाद सामने आए गंभीर आरोप
जानकारी के मुताबिक, छात्रा पीजी कॉलेज में बीए प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रही थी। उसने अपने घर के बाथरूम में फांसी लगाकर जान दे दी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम के बाद अब पुलिस छात्रा की मौत की वजह और उससे जुड़े तमाम पहलुओं की जांच में जुटी है।
इधर, छात्रा की मौत के बाद परिजनों ने एनएसयूआई छात्र नेता ज्ञान तिवारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि छात्रा को लंबे समय से कथित तौर पर प्रताड़ित और ब्लैकमेल किया जा रहा था। परिजनों के अनुसार, छात्रा ने कभी अपने परिवार के सामने इस परेशानी का जिक्र नहीं किया, लेकिन उसकी मौत के बाद दोस्तों से मिली जानकारी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिजनों ने अपनी शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच की मांग की है। अब पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि छात्रा की मौत से पहले उसके साथ क्या परिस्थितियां बनी थीं और क्या किसी व्यक्ति की कथित प्रताड़ना या दबाव का इसमें कोई संबंध था।
मोबाइल, कॉल डिटेल और सोशल मीडिया की जांच से खुलेगा राज?
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस छात्रा के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, सोशल मीडिया गतिविधियों और उसके दोस्तों से मिली जानकारी समेत अन्य साक्ष्यों की जांच कर सकती है। इन साक्ष्यों से छात्रा की मौत से पहले की परिस्थितियों और परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की सच्चाई सामने आने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, अभी तक पुलिस जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में ज्ञान तिवारी पर लगाए गए आरोपों को जांच के निष्कर्ष आने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। पुलिस की जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि छात्रा की मौत के पीछे वास्तव में क्या वजह थी।
फिलहाल गांधीनगर पुलिस मामले की जांच में जुटी है। छात्रा की मौत के बाद परिवार द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या छात्रा वास्तव में किसी दबाव या प्रताड़ना से परेशान थी? क्या उसकी मौत से पहले उसे ब्लैकमेल किया जा रहा था? और यदि परिजनों के आरोपों में सच्चाई है, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है? इन सभी सवालों के जवाब अब पुलिस जांच और सामने आने वाले साक्ष्यों से ही मिल पाएंगे।

