Chhattisgarh Shikshak Bharti 2025, Chhattisgarh Teacher Recruitment 2025: छत्तीसगढ़ में लंबे समय से शिक्षा में विभाग में शिक्षक भर्ती परीक्षा का इंतजार कर रहे प्रशिक्षित D.Ed और B.Ed डिग्रीधारी अभ्यर्थियों का अब सब्र का बांध टूट रहा हैं। जिसका नतीजा रविवार को राजधानी रायपुर में संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में प्रशिक्षित D.Ed और B.Ed एकजुट होकर सड़कों पर उतर आए। और साथ ही उन्होंने सरकार को चेतावनी भी दी हैं। कहा हैं, यदि 1 जून 2025 तक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। तो वे अनिश्चितकालीन आंदोलन की राह अपनाएंगे।
वहीं, रायपुर के सड़क में प्रशिक्षित D.Ed और B.Ed अभ्यर्थियों के उतरने के बाद संघ की ओर से जारी बयान में बताया गया कि, यह प्रदर्शन प्रदेश सरकार द्वारा किए गए चुनावी वादों के बार-बार टूटने के विरोध में हो रहा हैं। प्रदर्शकारियों ने 33 हजार रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती प्रक्रिया शुरू करने और भर्ती का नोटिफिकेशन जारी करने की मांग कर रहे हैं।
घोषणापत्र में किया वादा, लेकिन अब तक नहीं हुई कार्रवाई
आपको बता दें कि, छत्तीसगढ़ के प्रशिक्षित D.Ed. और B.Ed. संघ के नेताओं ने याद दिलाया कि, विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने अपने घोषणापत्र में 57 हजार शिक्षकों की भर्ती का वादा किया था। लेकिन, आज तक न तो वैकेंसी निकली और न ही कोई प्रक्रिया शुरू हुई। आगे संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि, ‘हमने कई बार शांतिपूर्ण ढंग से सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाई हैं। कई महीने आंदोलन कर चुके हैं। लेकिन, हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। अब आर-पार की लड़ाई होगी’।
संघ की 9 सूत्रीय प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं-
1. 33,000 रिक्त पदों पर शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए।
2. भर्ती के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया जाए।
3. नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
4. पूर्व प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं।
5. अनावश्यक उम्र सीमा प्रतिबंधों को हटाया जाए।
6. डी.एड./बी.एड. प्रशिक्षणधारी अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाए।
7. नियमित चयन वर्ष तय किया जाए।
8. ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को सरल किया जाए।
9. भर्ती परीक्षाओं की समयसीमा निश्चित की जाए।
वहीं, अब देखना यह होगा कि, छत्तीसगढ़ सरकार संघ की चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेती हैं। यदि सरकार ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया। तो 1 जून से रायपुर में हजारों प्रशिक्षित अभ्यर्थी अनिश्चितकालीन आंदोलन पर बैठ सकते हैं। जिससे शिक्षा विभाग के साथ-साथ प्रशासन पर भी दबाव बढ़ेगा।

