जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ में जांजगीर-चांपा जिले के खोखरा स्थित प्रसिद्ध मनकादाई मंदिर परिसर का शांत वातावरण रविवार को उस वक्त आक्रोश में बदल गया, जब इंसानी क्रूरता का एक वीभत्स चेहरा सामने आया। मंदिर के पवित्र तालाब में दशकों से रह रहे करीब 50 किलो वजनी एक विशालकाय कछुए पर अज्ञात उपद्रवियों ने जानलेवा हमला कर उसे लहूलुहान कर दिया। यह हमला इतना गंभीर था कि बेजुबान जीव दर्द से कराहता हुआ वापस पानी में ओझल हो गया, जिसे बाद में ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत कर बाहर निकाला।
विडंबना देखिए कि एक तरफ ग्रामीण उस कछुए की जान बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे थे, तो दूसरी तरफ सिस्टम की संवेदनहीनता अपनी सीमाएं लांघ रही थी। जब घायल कछुए के उपचार के लिए पशु विभाग के डॉक्टर ओगरे से संपर्क किया गया, तो उन्होंने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय इसे मत्स्य विभाग का मामला बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया। विभागों के बीच जिम्मेदारी के इस ‘फुटबॉल’ खेल ने उस बेजुबान के कीमती समय को बर्बाद कर दिया, जिससे उसकी हालत और भी चिंताजनक हो गई है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह कछुआ न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि इस तालाब की पहचान भी है, लेकिन पिछले कुछ समय से लगातार इसे निशाना बनाने की कोशिशें हो रही हैं। वर्तमान में पूरे गांव में भारी आक्रोश व्याप्त है और ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में प्रशासन से मांग की है कि इस अमानवीय कृत्य को अंजाम देने वाले दोषियों को तत्काल सलाखों के पीछे भेजा जाए और कछुए को विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

