नई दिल्ली। देश की सड़कों पर दौड़ने वाली स्लीपर बसों को अब सुरक्षा की अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा, क्योंकि केंद्र सरकार ने इनके रजिस्ट्रेशन नियमों में बड़े बदलाव कर दिए हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ‘बसवर्ल्ड इंडिया कॉन्क्लेव 2026’ के दौरान स्पष्ट किया कि यात्रियों की जान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और अब प्रत्येक नई स्लीपर कोच बस का भौतिक (फिजिकल) और वीडियो निरीक्षण अनिवार्य होगा।
संशोधित ‘बस बॉडी कोड’ के तहत जब तक अग्निशमन प्रणाली, आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट), हथौड़े और इमरजेंसी लाइट की पुख्ता जांच नहीं हो जाती, तब तक वाहन का रजिस्ट्रेशन संभव नहीं होगा।
सरकार ने यह कड़ा रुख पिछले कुछ वर्षों में बसों में आग लगने की भीषण घटनाओं और उनमें हुई सैकड़ों मौतों के बाद अपनाया है। इसी दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अब स्लीपर बसों के निर्माण का अधिकार केवल प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों या केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त प्लांटों को ही दिया गया है, ताकि मानकों में कोई कोताही न बरती जाए।
भारत के अनिवार्य बस बॉडी कोड ‘AIS-052’ के तहत अब हर बस की जांच रिपोर्ट ‘वाहन’ पोर्टल पर अपलोड की जाएगी, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। सरकार का मुख्य उद्देश्य तकनीक और कड़े नियमों के समन्वय से सड़क यात्रा को सुरक्षित बनाना है ताकि भविष्य में किसी भी खामी के कारण निर्दोष लोगों को अपनी जान न गंवानी पड़े।

