नई दिल्ली। देश की सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी (NEET-UG) को लेकर जारी विवादों के बीच केंद्र सरकार ने छात्रों के हित में कई क्रांतिकारी कदम उठाए हैं। पेपर लीक की घटनाओं से उपजी अव्यवस्था के बाद परीक्षा रद्द होने का जो दंश अभ्यर्थियों ने झेला था, उस पर मरहम लगाते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने न केवल सिस्टम की चूक की जिम्मेदारी स्वीकार की है, बल्कि आगामी 21 जून को होने वाली दोबारा परीक्षा के लिए सुविधाओं का एक नया रोडमैप भी पेश किया है।
अब परीक्षार्थियों को न तो केंद्र तक पहुँचने की चिंता होगी और न ही परीक्षा हॉल में समय की कमी खलेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि 14 जून से छात्र अपने एडमिट कार्ड प्राप्त कर सकेंगे, लेकिन इससे भी बड़ी राहत यह है कि परीक्षार्थियों को अपना मनपसंद परीक्षा शहर चुनने के लिए एक सप्ताह का विशेष अवसर दिया गया है।
छात्रों के मानसिक और आर्थिक तनाव को कम करने की दिशा में यह घोषणा ऐतिहासिक मानी जा रही है कि परीक्षा केंद्र तक जाने के लिए सरकार स्वयं ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था करेगी, जिससे किसी भी अभ्यर्थी पर यात्रा का वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। परीक्षा की संवेदनशीलता को देखते हुए शिक्षा मंत्रालय ने इस बार छात्रों को प्रश्नपत्र हल करने के लिए 15 मिनट का अतिरिक्त समय देने का भी निर्णय लिया है।
शिक्षा मंत्री ने भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए एक दूरगामी बदलाव का संकेत देते हुए स्पष्ट किया कि अगले वर्ष से नीट की परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (CBT) कर दिया जाएगा ताकि मानवीय हस्तक्षेप और पेपर लीक की संभावनाओं को जड़ से खत्म किया जा सके। सरकार का यह नया अंदाज न केवल व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की कोशिश है, बल्कि लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य को सुरक्षित करने का एक ठोस भरोसा भी है।

