अम्बिकापुर, छत्तीसगढ़: प्री-मानसून के आने के साथ ही सरगुजा के जंगलों में बहुताय मात्रा में पाया जाने वाला मौसमी फल जामुन पककर तैयार हो गया है.जिसे बेचने लिए अब ग्रामीण अम्बिकापुर के बाजार काले काले जामून लेकर आ रहे हैं. हालांकि आवक अभी कम होने के कारण इसका भाव काफी ज्यादा है बाजार में कहीं 100 तो कहीं 150 रुपए प्रति किलो भाव से बेचा जा रहा है. इसके बावजूद जामून खरीदने वालों की भीड़ काफी है. जामून की जादुई गुण से हालांकि हर कोई वाकिफ हैं. जानकारों की माने तो जामुन का फल 70 प्रतिशत खाने योग्य होता है इसमें ग्लूकोज और फ्रक्टोज दो मुख्य स्रोत होते हैं. फल में खनिजों की संख्या अधिक होती है.
आयुर्वेद के अनुसार जामुन में विटामिन, आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, फाइबर और कार्बोहाइड्रेट जैसे पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में सहायक होते हैं. यह स्वादिष्ट फल न सिर्फ सेहतमंद होता है, बल्कि कई तरह की बीमारियों से लड़ने की ताकत भी प्रदान करता है यही कारण है कि ये जून से अगस्त तक के बीच बाजार में मिलता है लेकिन इसके लाभकारी गुणों के कारण पंसारीक दुकान में 12 माह इस फल से बने जूस और पाउडर लोग खरीदते हैं.
जामुन, जिसे ‘जुबली फ्रूट’ भी कहा जाता है, अपने मीठे और खट्टे स्वाद के लिए खासा लोकप्रिय है. ये बैंगनी रंग का रसीला फल न केवल स्वाद में लाजवाब है, बल्कि सेहत के लिए भी एक वरदान साबित होता है. जामुन में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व और एंटीऑक्सिडेंट होते हैं, जो शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं. ये फल खासकर डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है क्योंकि ये ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में सहायता करता है.

इसके अलावा जामुन पाचन तंत्र को ठीक रखता है, स्किन करता है और बालों की सेहत सुधारता है और हृदय रोगों से भी बचात गर्मियों में जामुन का सेवन शरीर को ठंडक देता है और ऊर्जा भी प्रदान करता है.अन्य फलों की तुलना में यह कम कैलोरी प्रदान करता है एक मध्यम आकार का जामुन 3-4 कैलोरी देता है.

