अंबिकापुर। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन को लेकर प्रशासनिक तैयारियों के बीच करोड़ों रुपये के खर्च पर सवाल खड़े हो गए हैं। 21 जून को पीजी कॉलेज मैदान में प्रस्तावित कार्यक्रम के लिए करीब 6 करोड़ रुपये की लागत से तैयारियां की जा रही हैं। खास बात यह है कि आयोजन के लिए आधिकारिक निर्देश 16 जून को जारी हुए और 17 जून को बजट को मंजूरी मिली, लेकिन पीजी कॉलेज मैदान में विशाल डोम उससे पहले ही खड़ा हो चुका था।

मौके पर मौजूद तैयारियां और खड़ा डोम इस बात की गवाही दे रहे हैं कि काम आदेश जारी होने से पहले ही शुरू हो गया था। ऐसे में यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर करोड़ों रुपये के इस काम का फैसला किस स्तर पर लिया गया और बिना निविदा प्रक्रिया पूरी हुए निर्माण कार्य कैसे शुरू कर दिया गया। सूत्रों के अनुसार पूरे आयोजन का काम बिलासपुर की एक एजेंसी को सौंपा गया है, जिसे लेकर सत्ता के एक प्रभावशाली मंत्री के करीबी होने की चर्चा भी तेज है।
सरकारी नियमों के मुताबिक इतनी बड़ी राशि के कार्य के लिए ई-टेंडर और पारदर्शी प्रक्रिया जरूरी मानी जाती है, लेकिन यहां जमीन पर पहले काम नजर आया और बाद में प्रशासनिक आदेश व बजट स्वीकृति सामने आई। इससे पूरे मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जमीनी स्तर पर चल रहे काम को देखर यह साफ़ तौर पर पता चल रहा है कि पूरा फैसला बंद कमरों में पहले ही हो चुकी थी,अब कागजी प्रक्रिया केवल औपचारिकता रह गई है। बहरहाल जनता के पैसों का इन कार्यकमों की आड में किस तरह से लूटा जाता है और निजी लोगों को किस तरह से फायदा पहुंचाया जाता है यह सीएम विष्णु देव साय के योग दिवस कार्यक्रम में देख जा सकता है।

