सरगुजा : जिले में एक पत्र सोशल मीडिया में वायरल हो रहा हैं। जिसमें पद्मश्री पुरस्कार देने की अनुशंसा अंबिकापुर विधायक राजेश अग्रवाल ने पद्मश्री पुरस्कार समिति, गृह मंत्रालय, नॉर्थ ब्लॉक, नई दिल्ली से की गई हैं। पत्र वायरल होने के बाद चर्चाओं का बाजार भी गर्म हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता कौन हैं
सरगुजा संभाग सहित छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले आरटीआई कार्यकर्ता डीके सोनी ( दिनेश कुमार सोनी) अब नाम का मोहताज नही हैं। इनकी शुरुआत डेढ़ से दो दशक पूर्व सरगुजा जिला न्यायालय में टाइपिस्ट से शुरू हुई। जहाँ टाइपिस्ट का काम करके अपना जीवन यापन चला रहे थे। इनके द्वारा हमेशा से ही कड़ी मेहनत और लगन से काम करने का जज़्बा देखते ही बनता था। वही भारत देश मे अन्ना हजारे के आंदोलन ने एक ऐसा कानून ला दिया, जो भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए हर किसी को अधिकार मिल गया। आरटीआई (सूचना का अधिकार)12 अक्टूबर 2005 को पूरे भारत देश मे लागू हो गया। इधर डीके सोनी को जिला न्यायालय में टाइपिस्ट का हुनर, मानो सूचना का अधिकार कानून इंतजार कर रहा था। जिसके बाद धीरे-धीरे आरटीआई के तहत जानकारी लेने लगे, साथ ही वकालत की पढ़ाई भी पूरी हो रही थी, और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए मानो ऐसा की दृढ़ संकल्प ले लिया हो। इनके द्वारा भ्रष्टाचार के कई मामले भी उजागर किए गए, और यही सब कार्य को देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता और आरटीआई कार्यकर्ता के तौर पर देश-दुनिया में अवार्ड भी मिल रहे हैं।
पद्मश्री अवार्ड किसे दिया जाता हैं
पद्मश्री पुरस्कार भारत सरकार के द्वारा दिया जाता है। यह पुरस्कार राष्ट्रपति के हाथों दिया जाता हैं। इस पुरस्कार को कला, साहित्य, शिक्षा, खेल, चिकित्सा, सामाजिक कार्य विज्ञान और इंजीनियरिंग लोक कार्य, सिविल सेवा व्यापार और उद्योग आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाता है। इस पुरस्कार को एक प्रतिष्ठित पुरस्कार के रूप में माना जाता है। पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित व्यक्ति को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर और सील वाला एक सर्टिफिकेट और मेडल दिया जाता हैं।
अनुशंसा करने वाले विधायक ने क्या कहा
सोशल मीडिया में पद्मश्री पुरस्कार देने की अनुशंसा वाला पत्र वायरल हुआ तो पड़ताल न्यूज डॉट कॉम की जिज्ञासा जगी की इस पत्र में ऐसा क्या है कि सियासी गलियारों से लेकर आम लोगो मे चर्चा का विषय बना हुआ हैं। इसी बात को लेकर अंबिकापुर विधायक राजेश अग्रवाल, जो अभी मंत्री बनने का ख़्वाब सजाए घूम रहे हैं। इनसे पूछा गया कि आपके द्वारा पद्मश्री पुरस्कार के लिए अनुशंसा की गई हैं, तो इन्होंने कहा कि मेरे द्वारा पद्मश्री पुरस्कार के लिए अनुशंसा की गई है। मैंने इसकी जानकारी शीर्ष नेतृत्व को भी नहीं दी है। मेरे पास आरटीआई कार्यकर्ता डीके सोनी आए और कहा कि पद्मश्री पुरस्कार के लिए अनुशंसा कर दीजिए, फिर क्या था मैंने अपना लेटरपैड उठाया और लिख दिया।
शहर के बुद्धिजीवी और वकीलों ने क्या कहा
अंबिकापुर शहर के बुद्धिजीवी और वकीलों से डीके सोनी को पद्मश्री पुरस्कार दिए जाने की अनुशंसा पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई हैं। वकील नीरज वर्मा ने कहा कि आरटीआई कार्यकर्ता डीके सोनी ने गरीबों के लिए अभियान नहीं सिर्फ अपने लिए ही अभियान चलाया हैं। ना ही कोई वकालत कर रहे है। समाज के लिए शून्य हैं, साथ ही कहा कि इन्होंने ऐसा आज तक कोई सामाजिक काम भी नही किया। इन्होंने सिर्फ लोगो का बांस-बल्ली करने का काम किया है। जहाँ पैसा मिल गया उन्हें छोड़ दिया गया, और जिनसे पैसा नही मिला उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। इनका आज तक कोई ऐसा उत्कृष्ट कार्य तो नही दिख रहा हैं कि गरीबो के मसीहा हैं। समाज के बड़े शुभचिंतक है। ये अपना शुभचिंतक हैं, अपने स्वयं के लिए।
वकील अलंकार शर्मा ने भी बताया कि देखिए डीके सोनी को जानते हुए अनुपयुक्त और उपयुक्त व्यक्ति भी नहीं कहूंगा। इतना आसान नही होता कि आपको पद्मश्री का पुरस्कार मिल जाए। किसी के अनुशंसा को आधार मानकर पद्मश्री पुरस्कार देना कही से उचित नही हैं। पुरुस्कार देने से पहले सभी पहलुओं को देखना चाहिए। डीके सोनी ने आजतक कहा पर क्रांतिकारी कदम उठाया हो। इधर वकील शर्मा ने सामाजिक क्षेत्र में काम करने की तुलना डीके सोनी से बेहतर धीरेंद्र शर्मा को बता दिया है, साथ ही कहाँ न्यायालय में टाइपिस्ट होने का फायदा मिला और सूचना का अधिकार कानून आने के बाद अपने आप को अच्छा खासा आत्मनिर्भर बना। आज बड़ी हवेली हैं। अगर आरटीआई डीके सोनी को पद्मश्री पुरस्कार मिलता है तो इसकी गहन जांच होनी चाहिए, ताकि भारत सरकार द्वारा दिए जाने वाला प्रतिष्ठित पद्मश्री पुरस्कार का अपमान ना हो सके।

नोट -हम अगले एपिसोड में बताएंगे कि सेलिब्रिटीयो से अवॉर्ड कैसे प्राप्त किया जाता हैं।

