छत्तीसगढ़ में किसानों के लिए खाद की उपलब्धता और धान खरीदी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान सामने आया है। छत्तीसगढ़ मार्कफेड के अध्यक्ष शशिकांत द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में फिलहाल डीएपी (DAP) खाद की कमी जरूर है, लेकिन यूरिया की किसी प्रकार की कमी नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसानों की परेशानी जल्द दूर होगी, क्योंकि विदेश से डीएपी के दो बड़े जहाज भारत पहुंचने वाले हैं, जिसके बाद प्रदेश में खाद की आपूर्ति सामान्य हो जाएगी।
मार्कफेड अध्यक्ष ने कहा कि सरकार किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। डीएपी की कमी को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि खेती-किसानी का काम प्रभावित न हो और किसानों को राहत मिल सके।
इस दौरान धान खरीदी के दौरान हर साल होने वाली करोड़ों रुपये की कैप (कवर) खरीद पर भी उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी। कैप खरीद में भ्रष्टाचार के आरोपों पर शशिकांत द्विवेदी ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी गड़बड़ी की जानकारी नहीं है, लेकिन यदि कहीं भी भ्रष्टाचार पाया जाता है तो उसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है।
गौरतलब है कि प्रदेश में धान को सुरक्षित रखने के लिए हर साल लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत से कैप खरीदे जाते हैं। इसके बावजूद कई संग्रहण केंद्रों में पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिलने के कारण करोड़ों रुपये का धान खराब होने की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिससे इस व्यवस्था पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
वहीं, किसानों को धान बेचने के बाद भुगतान में हो रही देरी और सहकारी बैंकों से समय पर राशि नहीं मिलने के मुद्दे पर मार्कफेड अध्यक्ष कोई ठोस जवाब नहीं दे सके। प्रदेश के कई किसान धान बेचने के बाद अपने भुगतान के लिए बैंकों के लगातार चक्कर लगाने को मजबूर हैं। सहकारी बैंकों पर किसानों का भरोसा कमजोर पड़ने के सवाल पर उन्होंने इतना ही कहा कि सरकार लगातार प्रयास कर रही है ताकि किसानों का विश्वास बना रहे और भुगतान व्यवस्था में सुधार किया जा सके।

