अम्बिकापुर। बढ़ते प्रदूषण और महंगे ईंधन के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाना बेशक एक सराहनीय और सकारात्मक कदम है। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के जिला पंचायत उपाध्यक्ष देव नारायण यादव ने भी देशहित और पर्यावरण संरक्षण का हवाला देते हुए अपनी कीमती डीजल-पेट्रोल गाड़ियों को गैराज में खड़ा कर दिया है और ई-स्कूटी व मोटर साइकिल से दफ्तर आना-जाना शुरू कर दिया है। नेताजी का यह फैसला ईंधन की बचत के लिहाज से जितना बेहतरीन है, उनकी एक बड़ी लापरवाही ने इस पूरे ‘देशभक्ति’ के अभियान पर पानी फेर कर रख दिया है।
बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या जनप्रतिनिधि बनते ही नियम-कानून ताक पर रख दिए जाते हैं? जिला पंचायत उपाध्यक्ष महोदय ई-स्कूटी पर बैठकर बिना हेलमेट के धड़ल्ले से अपने कार्यालय और क्षेत्र में घूम रहे हैं। कलेक्ट्रेट परिसर, जहां कलेक्टर कार्यालय, एसपी कार्यालय और जिला पंचायत जैसे जिले के सबसे बड़े प्रशासनिक दफ्तर मौजूद हैं, वहां एक जिम्मेदार पद पर बैठा व्यक्ति सरेआम बिना हेलमेट गाड़ी दौड़ा रहा है। यह दृश्य देखकर आम जनता के मन में यही सवाल उठता है कि क्या नेताजी को कानून का कोई खौफ नहीं है या फिर उनका सिर आम इंसानों से अलग लोहे का बना है?

एक जनप्रतिनिधि का यह रवैया उनकी गंभीर लापरवाही और ‘कॉमन सेंस’ की भारी कमी को दर्शाता है। देशहित में पेट्रोल-डीजल बचाना अच्छी बात है, प्रधानमंत्री के निर्देशों का पालन करने का दावा करना भी सही है, लेकिन क्या देश का कानून खुद की सुरक्षा से बढ़कर है? जब नेताजी खुद ही नियमों की धज्जियां उड़ाएंगे, तो वह आम जनता को क्या सीख देंगे? बिना हेलमेट के कलेक्ट्रेट जैसे वीआईपी इलाके में घूमना किसी भी जनप्रतिनिधि को शोभा नहीं देता।
जब जिला पंचायत उपाध्यक्ष देव नारायण यादव से मीडियाकर्मियों द्वारा बात की गई, तो उन्होंने बड़े गर्व से कहा कि वे प्रधानमंत्री के निर्देशों का पालन कर रहे हैं और देश की स्थिति सुधारने के लिए उन्होंने पूरी तरह से डीजल गाड़ियां बंद कर दी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अम्बिकापुर से उनका जिला पंचायत क्षेत्र लगभग 10 किलोमीटर के दायरे में है, जहां वे ई-बाइक से ही जाते हैं और लोगों को भी इसके लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
नेताजी के इस ऊंचे दावों और पर्यावरण प्रेम की तारीफ की जानी चाहिए, लेकिन उनकी इस बिना हेलमेट वाली ‘स्टंटबाजी’ को देखकर जनता अब यह पूछ रही है कि यह वाकई पर्यावरण के प्रति प्रेम है या सिर्फ कैमरे के सामने अपनी चमक बिखेरने का एक सस्ता ‘दिखावा’? पेट्रोल-डीजल बचाने से पहले नेताजी को अपनी और दूसरों की जान की सुरक्षा की कीमत समझनी होगी, क्योंकि कानून सबके लिए बराबर है, चाहे वह आम नागरिक हो या कोई माननीय उपाध्यक्ष।

