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सरगुजा, छत्तीसगढ़। सरगुजा में वन विभाग की लापरवाही अब खुलकर सामने आने लगी है। ताजा मामला अंबिकापुर के ग्राम खैरबार, बांकी डैम मार्ग स्थित पनिका पारा का है, जहां आवारा कुत्तों के हमले में चीतल प्रजाति के वन्य जीव कोटरी की दर्दनाक मौत हो गई। बताया जा रहा है कि कोटरी जंगल से भटककर गांव के पास पहुंची थी, लेकिन सुरक्षा के इंतजाम न होने के कारण वह कुत्तों का शिकार बन गई।
चौंकाने वाली बात यह है कि महज 15 दिन पहले इसी इलाके में एक हिरण पर भी आवारा कुत्तों ने हमला किया था, जिसकी बाद में वन विभाग की देखरेख में मौत हो गई। लगातार दोहराई जा रही ये घटनाएं साफ तौर पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल रही हैं।
यही नहीं, 4 दिन पहले अंबिकापुर के संजय पार्क में 15 हिरणों की मौत का मामला भी सामने आ चुका है, जिसने पूरे प्रदेश में सुर्खियां बटोरी थीं।
वहीं कुछ दिनों पहले प्रतापपुर मार्ग पर हाथियों के सड़क पार करने के दौरान भी वन विभाग का एक भी कर्मचारी मौके पर मौजूद नहीं था, जो किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकता था।
इन तमाम घटनाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल सरगुजा के डीएफओ अभिषेक जोगावत की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। क्या वन विभाग सिर्फ घटनाओं के बाद कागजी कार्रवाई तक सीमित रह गया है? क्या जमीनी स्तर पर कोई ठोस योजना है भी या नहीं?

