नीलगिरी पेड़ों की कटाई से पहले एसडीएम की अनुमति अनिवार्य, नियमों का पालन जरूरी
अंबिकापुर: कई गांवों में किसान अपनी निजी राजस्व भूमि पर लगाए गए नीलगिरी (यूकेलिप्टस) के पेड़ों को काटकर निजी व्यक्तियों को बेच रहे हैं। हालांकि, नियमों के अनुसार, राजस्व भूमि पर लगे ऐसे पेड़ों की कटाई के लिए पहले उपमंडल दंडाधिकारी (एसडीएम) से अनुमति लेना आवश्यक है। इसके बिना कटाई अवैध मानी जाएगी और कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
एसडीएम की अनुमति के बाद ही मिलेगा एनओसी
एसडीएम की स्वीकृति के बाद वन विभाग एनटीपीसी प्रणाली के माध्यम से परिवहन के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करता है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि पेड़ों की कटाई नियमानुसार हो और अवैध लकड़ी व्यापार पर रोक लग सके। वन विभाग समय-समय पर इस संबंध में टिम्बर एसोसिएशन और अन्य सार्वजनिक मंचों के माध्यम से जागरूकता अभियान चला चुका है।
क्यों जरूरी है यह प्रक्रिया?
नीलगिरी के पेड़ वाणिज्यिक दृष्टि से उपयोगी होते हैं, लेकिन बिना अनुमति कटाई से पर्यावरणीय संतुलन पर असर पड़ सकता है। साथ ही, राजस्व भूमि पर लगे पेड़ों के अवैध कटान से सरकारी नियमों का उल्लंघन होता है। इसीलिए प्रशासन ने यह व्यवस्था लागू की है ताकि वन संपदा का सही तरीके से उपयोग हो और अवैध व्यापार पर रोक लगाई जा सके।
जनहित में जारी सूचना
वन विभाग ने एक बार फिर किसानों और व्यापारियों को सूचित किया है कि वे नीलगिरी के पेड़ों की कटाई से पहले अनिवार्य रूप से एसडीएम की अनुमति प्राप्त करें। एनओसी से संबंधित अधिक जानकारी के लिए संबंधित कार्यालय से संपर्क करें। नियमों का पालन न करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

