सरगुजा, छत्तीसगढ़। अंबिकापुर के कोतवाली थाना क्षेत्र में राम मंदिर के पास स्थित मुकेश प्लास्टिक और पटाखा दुकान में लगी आग ने देखते ही देखते भयावह रूप ले लिया। घनी आबादी वाले इस इलाके में जैसे ही आग भड़की, अफरातफरी मच गई और लोग अपने घरों से बाहर निकलकर सुरक्षित जगहों की ओर भागने लगे। शुरुआत में आग एक दुकान तक सीमित थी, लेकिन हालात तब और खतरनाक हो गए जब लपटें पास में रखे पटाखों तक पहुंच गईं।

ताजा स्थिति के मुताबिक पटाखा दुकान में आग लगने के बाद लगातार तेज धमाके हो रहे हैं। एक के बाद एक फूटते पटाखों की आवाज से पूरा इलाका दहल उठा है। आसमान में धुएं का गुबार और जमीन पर फैलती आग ने माहौल को और भयावह बना दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार धमाकों की तीव्रता इतनी ज्यादा है कि आसपास के लोग दहशत में हैं और किसी बड़ी अनहोनी की आशंका जताई जा रही है।

दमकल की टीम मौके पर मौजूद है और आग पर काबू पाने की लगातार कोशिश की जा रही है, लेकिन पटाखों के फूटने के कारण राहत कार्य में भारी दिक्कतें आ रही हैं। पुलिस भी इलाके को खाली कराने में जुटी हुई है ताकि किसी तरह की जनहानि को रोका जा सके। अभी तक किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन खतरा लगातार बना हुआ है।
सबसे बड़ा सवाल उस गोदाम को लेकर खड़ा हो गया है जहां भारी मात्रा में बम और पटाखे रखे गए थे। जानकारी के मुताबिक इस भंडारण के लिए किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई थी, फिर भी पिछले करीब 20 वर्षों से यहां पटाखों का जखीरा रखा जा रहा था और दीपावली के बाद शादी-विवाह जैसे आयोजनों में इसकी सप्लाई की जाती थी।

इस घटना ने प्रशासन और निगरानी व्यवस्था की गंभीर लापरवाही को उजागर कर दिया है। घनी आबादी के बीच बारूद का इतना बड़ा भंडारण न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सीधे तौर पर लोगों की जान से खिलवाड़ भी है। अगर समय रहते सख्त कार्रवाई की जाती, तो आज अंबिकापुर को इस खौफनाक मंजर का सामना नहीं करना पड़ता। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच जारी है, लेकिन यह हादसा शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो गया है।

