अंबिकापुर: तो क्या आपसी “अदृश्य झगड़े” वर्चस्व की लड़ाई और चहेते ठेकेदारों की वजह से बार-बार निरस्त हो रही डामरीकरण की टेंडर प्रक्रिया? क्या शहर सरकार और संगठन में बैठे लोगों के बीच नही बैठ रहा तालमेल? क्या संगठन में बैठे लोगों की दबंगई शहर सरकार पर पड़ रही भारी? बारिश के पहले क्यों नही सुधारी गई अंबिकापुर की जानलेवा सड़क? कई ऐसे सवाल है शायद जिसका जवाब अंबिकापुर की शहर सरकार के पास तो है लेकिन सरकार देना नही चाहती।
दरअसल इन दिनों अंबिकापुर की जानलेवा सड़क की चर्चा खूब हो रही है। नगरीय निकाय चुनाव से पहले अंबिकापुर की बदहाल सड़क के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने वाली भाजपा की शहर सरकार की जमकर आलोचना हो रही है। और आलोचना हो भी क्यों न बारिश में नगर निगम क्षेत्र की सड़क पूरी तहत बर्बाद हो चुकी है। सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे नज़र आते है। कुछ ही घण्टों की बारिश में जल भराव की स्थिति अब सामान्य सी बात है। ऐसी परिस्थितियों में नगर निगम को जिम्मदार ठहरना आमजन के लिए लाज़मी है।


लेकिन सवाल ये की ऐसी परिस्थियां उत्पन्न क्यों हुई। बारिश के सीजन से पहले बदहाल सड़कों के सुधार कार्य के लिए राज्य सरकार ने अंबिकापुर नगर निगम को लगभग 6 करोड़ रुपये आबंटित किया था। सड़क को 5 जोन में बांट कर सड़क का डामरीकरण होना था ताकि बारिश से पहले अंबिकापुर नगर निगम क्षेत्र की बादल सड़कों को सुधारा जा सके। लेकिन बारिश के पहले सड़क बनाना तो दूर नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों ने 22 अप्रैल से शुरू हुई टेंडर प्रक्रिया को 23 जुलाई तक पूरी नहीं किया। इस अवधि के दौरान नगर निगम के अधिकारियों ने 3 बार टेंडर की प्रक्रिया को निरस्त किया है। ऐसे में नगर निगम के अधिकारियों और शहर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठ रहा है। आखिर क्यों राशि के आवंटन के बावजूद शहर सरकार बारिश से पहले सड़क बनाने में विफल साबित हुई। अब इसका खामियाजा आमजनों को उठाना पड़ रहा है। नागरिक जान हथेली पर रखकर अंबिकापुर की जानलेवा सड़क पर चलने को मजबूर हैं।

निरस्त हो रही टेंडर प्रक्रिया पर कांग्रेस ने उठाया सवाल


अंबिकापुर नगर निगम नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने प्रेसवार्ता कर भाजपा की निगम सरकार पर जमकर हमला बोला है। सड़कों के डामरीकरण के लिए बार-बार निरस्त हो रही टेंडर प्रक्रिया पर शफी अहमद ने सवाल उठाया है। सफी अहमद ने आरोप लगाया कि शहर सरकार में बैठे लोग अपने चहिते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए नगर निगम के अधिकारियों पर दबाव बना रहे है। वहीं नगर निगम आयुक्त बिना कारण सड़कों के डामरीकरण के लिए बुलाई गई निविदा को निरस्त कर रहे हैं। एक तरफ इसका नुकसान टेंडर भरने वाले ठेकेदारों को उठाना पड़ रहा है साथ ही आम जनता तो परेशान है ही।
कांग्रेस ने शहर सरकार को दी चेतावनी
निगम नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने प्रेसवार्ता कर भाजपा की शहर सरकार को चेतावनी दी है कि यदि लोगों की समस्या को देखते हुए जानलेवा सड़क की स्थिति नहीं सुधारी गई, नालियों की साफ सफाई नहीं की गई, सड़क पर बैठे आवारा मवेशियों को सड़क से हटाकर उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखने की व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में कांग्रेस शहर सरकार के खिलाफ चक्का जाम, नगर निगम का घेरा सहित चरणबद्ध तरीके से उग्र आंदोलन करने को मजबूर होगी।
क्या संगठन में बैठे लोगों और शहर सरकार के बीच नहीं जम पा रहा गन्ना
अंबिकापुर की बदहाल सड़कों की चर्चा सोशल मीडिया से लेकर अखबारों और न्यूज़ चैनलों में खूब हो रही है। हर कोई जल भराव वाली सड़कों को सोशल मीडिया में डालकर शहर सरकार को कोस रहा है। लेकिन एक और चर्चा है जो नगर निगम की “गलियारों में दबिजबान खूब” हो रही है। चर्चा है कि शहर सरकार और संगठन में बैठे कुछ स्थानीय कद्दावर नेता नगर निगम में होने वाले टेंडर को लेकर आमने-सामने है। हर कोई अपना घोड़ा नगर निगम में बैठाना चाहता है। निगम सरकार और संगठन से जुड़े लोग अपने-अपने ठेकेदारों को टेंडर दिलवाना चाहते हैं। श्याद यही वजह है कि आपसी राजनीति और वर्चस्व की लड़ाई में शहर की सड़क बनना तो दूर टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी होने के बजाये बार बार निरस्त हो रही है।

