छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के पत्थलगांव में कटहल मेले का आयोजन किया गया, जहां 36.63 किलो वजनी कटहल ने सभी का ध्यान खींचा। यह मेला जिला प्रशासन और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के संयुक्त प्रयास से जशपुर में आयोजित हुआ, जिसका उद्देश्य कटहल फसल के वैज्ञानिक प्रसंस्करण, नवाचार और विपणन के माध्यम से किसानों की आमदनी बढ़ाना और जीवन स्तर सुधारना रहा।
मेले में कटहल की उपयोगिता, उससे बनने वाले उत्पाद, और आधुनिक तकनीकों से अधिक उत्पादन पर जानकारी दी गई। कटहल से बने अचार, पापड़, चिप्स सहित अन्य उत्पादों का प्रदर्शन भी किया गया। इस दौरान किसानों के बीच विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिनमें सबसे बड़े कटहल के लिए कुरमीटिकरा के त्रिलोचन सिंह को उनके 36.63 किलो के कटहल पर प्रथम पुरस्कार और ₹5001 की राशि दी गई।
कलेक्टर रोहित व्यास ने कटहल को ‘चमत्कारी फल’ बताते हुए इसके पोषण मूल्य और स्वास्थ्य लाभों पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि कटहल में विटामिन सी, ए, मैग्नीशियम, फाइबर और एंटीऑक्सिडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो वजन घटाने, डायबिटीज नियंत्रण और इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक होते हैं।
वहीं रायमुनी भगत ने कहा कि कटहल पारंपरिक रूप से गांवों में आजीविका का स्रोत रहा है। अब वैज्ञानिक तरीके से इसके प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन से किसानों को आर्थिक रूप से और सशक्त बनाया जा सकता है।
महिला स्व-सहायता समूहों को भी कटहल प्रसंस्करण के लिए प्रशिक्षण और विपणन सहायता दी जा रही है। प्रशासन की योजना है कि उन्नत किस्म के पौधे देकर कटहल उत्पादन को और बढ़ाया जाए, ताकि अधिक किसानों को इसका लाभ मिल सके।

