सरगुजा : छत्तीसगढ़ में हुए युक्ति युक्तकरण ने शिक्षकों को परेशान कर दिया है। जिले में उच्च अधिकारियों से पकड़ रखने वाले शिक्षकों की अतिशेष शिक्षक की सूची से नाम हटा दिया जाए तो कई सवाल खड़े होते हैं। मामला सरगुजा जिले का है, जहां 3 एबीईओ को अतिशेष शिक्षक की सूची से बाहर कर दिया गया है।
राज्य शासन की प्रतिनियुक्ति
राज्य शासन के द्वारा अगर प्रतिनियुक्ति देकर एबीईओ बनाया जाता तो अतिशेष शिक्षकों की सूची से बाहर रहते। लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी के चहेते होने की वजह से अतिशेष सूची से 3 एबीईओ का नाम हटा दिया गया है। लेकिन दूसरी तरफ राज्य शासन ने संलग्नीकरण पहले ही समाप्त कर दिया है, तो ऐसे में अतिशेष सूची से 3 एलबी शिक्षक का नाम हटने के बाद से शिक्षा विभाग के कार्य प्रणाली पर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
3 एबीईओ कौन हैं..?
मनोज तिवारी ,जॉलशन बड़ा, सतीश तिवारी ये 3 नाम है जो सरगुजा जिले में एबीईओ के पद पर पदस्थ हैं। इन 3 एबीईओ में बड़ा नाम सतीश तिवारी का है। जिनकी मूल पद स्थापना मैनपाट में है। लेकिन पकड़ इतनी मजबूत है कि अंबिकापुर के एबीईओ के तौर पर अपना कार्यभर संभाल रहे हैं। इतना ही नहीं जब अंबिकापुर के एबीईओ के तौर पर कार्यभार संभालने वाले थे। उससे पहले संयुक्त संचालक शिक्षा विभाग के अधिकारी हेमंत उपाध्याय के द्वारा उनके कार्यालय पहुंचकर पदभार ग्रहण करवाया गया था। तो आप समझ ही गए होंगे कि कितने पावरफुल एबीईओ सतीश तिवारी हैं।



अतिशेष शिक्षक से कैसे बचाया गया इन्हें
संयुक्त संचालक की अधिकारी के द्वारा अतिशेष शिक्षकों को लेकर काउंसलिंग करवाया गया। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा अतिशेष शिक्षकों की सूची जारी की गई। लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी के करीबी होने के कारण अतिशेष शिक्षकों की सूची से इन 3 एबीईओ के नाम को हटा दिया गया। लेकिन इन्हें यह पता नहीं है कि राज्य सरकार ने संलग्नीकरण समाप्त कर दिया है, तो ऐसे में राज्य शासन के द्वारा प्रतिनियुक्ति के बाद ही यह संभव है कि आप अतिशेष शिक्षक सूची से बाहर हो सकते हैं। लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा ही एबीईओ बनाया गया है।
लोक शिक्षण संचनालय के अधिकारी के सख्त निर्देश
छत्तीसगढ़ में अतिशेष शिक्षकों की काउंसलिंग से लेकर सूची तैयार और पदस्थापना में किसी भी तरह की लापरवाही को लेकर लोक शिक्षण संचनालय के अधिकारी ऋतुराज रघुवंशी ने पहले ही साफ कर दिया था कि अतिशेष शिक्षकों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी । लेकिन इधर तो संयुक्त संचालक शिक्षा विभाग से लेकर जिला शिक्षा अधिकारी अपना साम्राज्य बनाकर जिले में शिक्षा विभाग का संचालन किया जा रहा है। वहीं दूसरी और अतिशेष शिक्षकों की सूची सही तरीके से जारी नहीं करने से शिक्षकों में भी नाराजगी देखी जा रही है। अब देखना होगा कि सरकार इसके बाद क्या कड़ा रुख अपनाती है, या इस तरह से भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले अधिकारी मौज में रहेंगे।

