सरगुजा, छत्तीसगढ़। सीतापुर में सामने आए संवेदनशील रेप केस ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। तीन नाबालिग बच्चियों को मेडिकल कॉलेज अस्पताल मुलायजा के लिए लाया गया, लेकिन इस दौरान मौजूद डॉक्टर के व्यवहार ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। आरोप है कि डॉक्टर अविनाशी कुजूर ने न सिर्फ मीडिया के साथ अनुचित तरीके से बात की, बल्कि पीड़ित बच्चियों के साथ भी असंवेदनशील व्यवहार किया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब मीडिया अस्पताल परिसर में मौजूद थी, तब डॉक्टर द्वारा बिना स्पष्ट कारण के उन्हें वहां से हटने के लिए कहा गया। इतना ही नहीं, परिसर के बाहर हो रही वीडियोग्राफी पर भी नाराजगी जताते हुए ऊंची आवाज में आपत्ति दर्ज की गई। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान डॉक्टर का रवैया बेहद कठोर और असहज बताया जा रहा है।
मामले को और गंभीर तब माना जा रहा है जब यह आरोप सामने आया कि जिन तीन बच्चियों का मेडिकल परीक्षण किया जा रहा था, उनके साथ भी डॉक्टर द्वारा बदतमीजी की गई। रेप जैसे संवेदनशील और गंभीर अपराध में जहां पीड़ितों के साथ संवेदनशीलता और सहानुभूति की अपेक्षा होती है, वहां इस तरह का व्यवहार कई सवाल खड़े कर रहा है।
अब बड़ा सवाल डॉक्टर अविनाशी कुजूर पर है कि क्या डॉक्टर को किसी प्रकार का संरक्षण या “ऊपर से सेटिंग” प्राप्त है, जिसके चलते इस तरह का व्यवहार सार्वजनिक रूप से भी देखने को मिला। हालांकि, इस संबंध में अभी तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
फिलहाल, यह मामला केवल अपराध तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब सिस्टम के भीतर संवेदनशील मामलों को संभालने के तरीके पर भी सवाल उठने लगे हैं।

