बलरामपुर। छत्तीसगढ़ में फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनाकर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में भर्ती कराने वाले एक बड़े गिरोह का बलरामपुर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। मामले में मुख्य सरगना समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह दूसरे राज्यों के युवाओं को छत्तीसगढ़ का निवासी दिखाकर सीआरपीएफ, सीआईएसएफ और एसएसबी जैसी केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों में भर्ती का अवैध लाभ दिला रहा था।
मामले की शुरुआत तहसीलदार बलरामपुर की शिकायत से हुई, जिसमें आरोप लगाया गया कि राजस्थान निवासी सुमित सिंह ने कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर बलरामपुर तहसील से छत्तीसगढ़ का निवास प्रमाण पत्र जारी करवा लिया। इसी प्रमाण पत्र के आधार पर उसने वर्ष 2023 में सीआरपीएफ में भर्ती का लाभ प्राप्त किया था।
पुलिस जांच में सामने आया कि मध्यप्रदेश के मुरैना निवासी विवेक सिंह तोमर इस पूरे नेटवर्क का मुख्य संचालक था। वह दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों से 3 से 4 लाख रुपये लेकर उनके लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करवाता था। उसके सहयोगी आकाश शर्मा और ओमप्रकाश चंद्रवंशी ऑनलाइन पोर्टल पर फर्जी आवेदन जमा कर निवास प्रमाण पत्र जारी करवाने का काम करते थे।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपियों ने फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और शैक्षणिक दस्तावेज तैयार कर कई लोगों के नाम बदलकर उन्हें छत्तीसगढ़ का निवासी दर्शाया। इसके लिए ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल का दुरुपयोग किया गया और दस्तावेजों में डिजिटल छेड़छाड़ कर आवेदन प्रस्तुत किए गए।
पुलिस के अनुसार डोंगरगढ़ तहसील समेत प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से 20 से 25 फर्जी निवास प्रमाण पत्र जारी करवाए गए हैं। आशंका है कि इन दस्तावेजों के आधार पर कई गैर-निवासी युवक केंद्रीय पुलिस बलों में भर्ती हो चुके हैं या भर्ती की प्रक्रिया में शामिल हैं।
आरोपी ओमप्रकाश चंद्रवंशी के कब्जे से घटना में प्रयुक्त कंप्यूटर सिस्टम भी जब्त किया गया है। पुलिस अब ऐसे सभी प्रमाण पत्रों की जांच कर रही है और संबंधित केंद्रीय सुरक्षा बलों को पत्र लिखकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
पुलिस का मानना है कि छत्तीसगढ़ का कट-ऑफ अन्य राज्यों की तुलना में कम होने के कारण यह गिरोह युवाओं को नौकरी का लालच देकर लाखों रुपये वसूल रहा था। मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

