सरगुजा जिले के सीतापुर क्षेत्र में एक महीने पहले हुई दरिंदगी की घटना आज भी लोगों के जहन में जिंदा है। दो नाबालिग बच्चियों के साथ हुई हैवानियत ने पूरे इलाके को शर्मसार कर दिया था। परिवारों की आंखों में डर था, लोगों में गुस्सा था। लेकिन सत्ता और राजनीति उस दर्द के सामने कहीं न कहीं बौनी नजर आई।

अब उसी सीतापुर में विधायक को लेकर नया विवाद सामने आया है। शासकीय अधिकारियों से विवाद और मारपीट की चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है। यही वजह है कि अब पुराने मामले को याद करना अब जरूरी हो गया है। विधायक रामकुमार टोप्पो जो अभी अपने बहन के लिए नायब तहसीलदार से लड़ गए वो उस समय खामोश कियू थे? जब 2 नाबालिक मासूम बच्चियों के साथ दरिंदगी और रेप जैसी घटना सामने आई थी तब आखिर जनप्रतिनिधि की प्राथमिकताएं क्या थी ?
जिस क्षेत्र में बेटियां सुरक्षित नहीं, वहां सबसे मजबूत आवाज जनता के चुने हुए प्रतिनिधि की होनी चाहिए थी, यानि जनता द्वारा चुने हुए बीजेपी विधायक रामकुमार टोप्पो। लेकिन लोगों को लगा कि उस वक्त राजनीतिक तेवर गायब थे। अब जब निजी मामला सामने आया तो अचानक आक्रोश, दबाव और शक्ति प्रदर्शन दिखाई देने लगा। यही फर्क अब जनता को चुभ रहा है।
सीतापुर की गलियों में चर्चा है कि अगर यही जोश उस वक्त दिखाई जाती, जब बच्चियों के साथ दरिंदगी हुई थी, तो शायद जनता को यह भरोसा मिलता कि उनका विधायक सच में उनके साथ खड़ा है। लेकिन घटनाओं के बीच दिखा यह फर्क अब विधायक की छवि पर सवाल खड़े कर रहा है।
अब विधायक रामकुमार टोप्पो पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या राजनीति का इस्तेमाल सिर्फ अपने लोगों के लिए होगा ? क्या आम परिवारों का दर्द इतना कमजोर है कि उस पर सत्ता की आवाज बुलंद नहीं होती हैं ?

