सरगुजा। राजस्व प्रकरणों में फर्जी आदेश बनाकर भूमि की रजिस्ट्री कराने का एक बड़ा मामला सामने आया है। कलेक्टर सरगुजा के आदेश पर थाना कोतवाली और गांधीनगर में कुल 11 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें से एक मामले में 6 सितंबर 2024 को अम्बिकापुर तहसीलदार ने कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि पक्षकार अशोक अग्रवाल के खिलाफ पारित आदेश संदेहास्पद हैं। एक अन्य मामले में पक्षकार मो. फारूख और भगतु राम के भूमि प्रकरण में राजस्व मंडल का आदेश संदिग्ध पाया गया था।
उच्च न्यायालय ने आरोपियों के अग्रिम जमानत को किया खारिज
इन दोनों मामलों में पुलिस ने धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया था। इसके पश्चात आरोपियों ने उच्च न्यायालय बिलासपुर में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था, जिसे न्यायालय ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए निरस्त कर दिया।
इस मामले में कई मास्टर मांइड हैं
इसी मामले में आरोपी मो. फारूख को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था। वहीं, मुख्य आरोपी दस्तगीर अंसारी को उत्तर प्रदेश के बिंद्मगंज से गिरफ्तार किया गया। मामले की जाँच के दौरान सरल क्रमांक 21, 29 और 37 के तहत अब्दुल हक, जमीर हसन और कासीम फिरदौशी के नाम भी सामने आए हैं। इनमें से मास्टरमाइंड नूर-ए-हक फिरदौशी बताया जा रहा है।

कोतवाली पुलिस को है जानकारी
हैरानी की बात यह है कि कासीम फिरदौशी का मोबाइल नंबर चालू होने के बावजूद पुलिस अब तक उसे गिरफ्तार नहीं कर पाई है। आरोप है कि कूटरचित करने वाले आरोपी अम्बिकापुर के रिंग रोड स्थित खरसीया नाका के आगे लक्ष्मी होटल के सामने बैठे रहते हैं, लेकिन इतने बड़े अपराध के बावजूद पुलिस और प्रशासन का उन पर कोई दबाव नहीं दिख रहा है।

सरगुजा एसपी योगेश पटेल ने कहा
राजस्व प्रकरणों में दस्तावेज की कूटरचना करने वाले आरोपियों जो भी फरार चल रहे है उनकी तलाश की जा रही हैं साथ ही इन आरोपियों के खिलाफ सबूत भी जुटाए जा रहे है और इस पूरे प्रकरण में जो भी आरोपी होंगे उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा। जल्द ही सभी आरोपी सलाखों के पीछे होंगे।
बहरहाल देखना होगा कि सरगुजा जिले में भू माफियाओं के द्वारा जिस तरह से फर्जीवाड़ाकर सरकारी जमीन के अलावा आदिवासियों की जमीनों को फर्जी दस्तावेज तैयार कर अपने नाम दर्ज कराया जा रहा है। इस पर सरकार का क्या रुख होता है या भी देखने वाली बात होगी, क्योंकि लगातार इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं और भू माफियाओं के हौसले भी बुलंद होने की वजह स्थानीय प्रशासन के सुस्त रवैये को माना जा रहा है।

