सरगुजा, छत्तीसगढ़। अंबिकापुर के मॉन्टफोर्ड स्कूल की मनमानी और नियमों की अनदेखी अब खुलकर सामने आ गई है। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा किए गए आकस्मिक निरीक्षण में स्कूल की कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं, जिससे अभिभावकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
जांच में पाया गया कि मॉन्टफोर्ड स्कूल अंबिकापुर द्वारा कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों को जबरन “आशा बुक डिपो” और “राणा बुक स्टोर” से ही किताबें और कॉपियां खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा था। स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को मोबाइल मैसेज भेजकर इन्हीं दुकानों से खरीदारी करने का दबाव बना रहा था।
सबसे बड़ी बात यह सामने आई कि मॉन्टफोर्ड स्कूल में किताबों और कॉपियों को “बंडल” बनाकर बेचा जा रहा था, जिससे अभिभावकों को जरूरत से ज्यादा और महंगी सामग्री खरीदनी पड़ रही थी। कई अभिभावकों ने बताया कि उन्हें अपनी जरूरत के अनुसार किताबें लेने की छूट तक नहीं दी जा रही थी।
निरीक्षण में यह भी साफ हुआ कि मॉन्टफोर्ड स्कूल अंबिकापुर CBSE Affiliation Bye-Laws 2018 का खुला उल्लंघन कर रहा है। नियमों के बावजूद छोटे बच्चों से लेकर 12वीं तक के छात्रों पर प्राइवेट पब्लिशर की महंगी किताबें थोपी जा रही थीं।
इसके अलावा मॉन्टफोर्ड स्कूल हर साल एडमिशन फीस भी वसूल रहा था, जबकि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत यह पूरी तरह प्रतिबंधित है। इतना ही नहीं, 2026-27 सत्र के लिए 5% से 14% तक फीस बढ़ोतरी भी सामने आई है, जो सीधे तौर पर अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ाने वाला कदम है।
स्कूल द्वारा यूनिफॉर्म और किताबों की सूची भी सार्वजनिक नहीं की गई, जिससे पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। साफ है कि मॉन्टफोर्ड स्कूल अंबिकापुर ने एक तय सिस्टम बनाकर अभिभावकों को महंगी खरीदारी के लिए मजबूर किया।
इन सभी मामलों को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने मॉन्टफोर्ड स्कूल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। साथ ही लगभग 2070 छात्रों से वसूली गई फीस का 50% तक जुर्माना लगाने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या मॉन्टफोर्ड स्कूल अंबिकापुर पर सख्त कार्रवाई होगी या फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

