नई दिल्ली। पश्चिम एशिया के रणक्षेत्र में बढ़ते तनाव और वैश्विक अस्थिरता के बीच भारतीय रसोई के लिए एक सुकून देने वाली खबर सामने आई है। सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील और खतरनाक माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की बाधाओं को पार करते हुए एलपीजी से लदे दो विशाल भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से भारत की ओर बढ़ रहे हैं। इन जहाजों के जरिए कुल 66,392 मीट्रिक टन रसोई गैस की खेप देश पहुंच रही है, जो पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों के बीच आम जनता के लिए राहत का बड़ा संकेत है। इस कड़ी में ‘सिमी’ नामक एलपीजी कैरियर, जो 21 जांबाज क्रू मेंबर्स के साथ कतर के रास लफान टर्मिनल से रवाना हुआ था, बुधवार को सफलतापूर्वक इस चुनौतीपूर्ण जलमार्ग को पार कर चुका है और आज गुजरात के कांडला स्थित दीनदयाल बंदरगाह पर लंगर डालेगा।
इस मिशन की सफलता की पुष्टि करते हुए बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने जानकारी दी है कि ‘सिमी’ के साथ-साथ ‘एनवी सनशाइन’ ने भी सुरक्षित रूप से इस मार्ग को पार कर लिया है। मार्शल द्वीप के ध्वज वाला ‘सिमी’ जहां 19,965 टन गैस लेकर कांडला पहुंच रहा है, वहीं वियतनाम के ध्वज वाला पोत ‘एनवी सनशाइन’ यूएई की रुवैस रिफाइनरी से 46,427 टन एलपीजी लेकर 18 मई तक न्यू मंगलुरु पोर्ट पहुंचेगा। गौरतलब है कि ये दोनों ही बड़ी खेपें इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) की हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग की वजह से वैश्विक समुद्री व्यापारिक मार्ग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। हालांकि, भारतीय समुद्री आपूर्ति शृंखला की मजबूती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मार्च की शुरुआत से अब तक कुल 13 भारतीय जहाज इस खतरनाक मार्ग से सुरक्षित निकल चुके हैं। हालांकि खाड़ी क्षेत्र में अभी भी करीब 12 भारतीय पोत फंसे हुए हैं और कई विदेशी जहाज भी प्रभावित हैं, लेकिन इन दो जहाजों का सुरक्षित आगमन भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक सतर्कता की एक बड़ी जीत माना जा रहा है।

