रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में मानवता और कानून की रक्षा के संगम ने एक नई मिसाल पेश की है, जहाँ पुलिस के विशेष अभियान “ऑपरेशन तलाश” ने सैकड़ों परिवारों की सूनी आंखों में फिर से उम्मीद की रोशनी भर दी है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) शशि मोहन सिंह के कुशल मार्गदर्शन में जिला पुलिस ने अप्रैल माह के भीतर एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल करते हुए कुल 251 गुमशुदा व्यक्तियों को सुरक्षित तलाश कर उनके परिजनों के सुपुर्द किया है।

इस वृहद अभियान की सफलता न केवल आंकड़ों में झलकती है, बल्कि उन 36 नाबालिगों और 215 बालिग युवक-युवतियों की सुरक्षित घर वापसी में भी दिखती है, जिनकी तलाश में रायगढ़ पुलिस की टीमें दिल्ली की भीड़भाड़ वाली गलियों से लेकर पंजाब के जालंधर, अंबिकापुर, डभरा और चंद्रपुर जैसे सुदूर इलाकों तक जा पहुंचीं। यह पूरा मिशन कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ पुलिस के मानवीय चेहरे को भी उजागर करता है, जहाँ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी, डीएसपी उन्नति ठाकुर और अनुविभागीय अधिकारियों की कड़ी मॉनिटरिंग ने इस अभियान को मुकाम तक पहुंचाया।

गुमशुदा बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए रायगढ़ पुलिस ने इस अभियान के दौरान अत्यधिक संवेदनशीलता का परिचय दिया। पुलिस की कार्रवाई केवल बच्चों को ढूंढने तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि उन अपराधियों के विरुद्ध भी वज्रपात की तरह काम किया जिन्होंने मासूमियत को निशाना बनाया। जांच के दौरान जहाँ भी नाबालिगों को बहला-फुसलाकर ले जाने या उनके शारीरिक शोषण के साक्ष्य मिले, वहां पुलिस ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट जैसी गंभीर धाराओं के तहत कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की। जूटमिल, पूंजीपथरा और कोतवाली थानों की मुस्तैदी इस दिशा में सराहनीय रही, जिन्होंने न केवल राज्य के भीतर बल्कि अंतरराज्यीय स्तर पर जाल बिछाकर आरोपियों को दबोचा और पीड़ितों को सुरक्षित वातावरण प्रदान किया।

जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में इस अभियान की सफलता की होड़ सी दिखी, जिसमें लैलूंगा थाने ने सर्वाधिक 42 गुमशुदा व्यक्तियों को ढूंढकर सूची में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। लैलूंगा पुलिस की सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने एक लापता व्यक्ति को देश की राजधानी दिल्ली से ढूंढ निकाला। इसी क्रम में चक्रधरनगर ने 29, जूटमिल ने 27 और पूंजीपथरा ने 24 लोगों को उनके परिवारों से मिलाया, जबकि कोतवाली, पुसौर, कोतरारोड और अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के थानों ने भी अपनी सक्रियता से अभियान को सफल बनाया।

विशेष रूप से भूपदेवपुर थाने का प्रदर्शन प्रतिशत के आधार पर सबसे उत्कृष्ट रहा, जहाँ दर्ज सभी नाबालिगों के मामलों को रिकॉर्ड समय में सुलझा लिया गया। पुलिस की इस तत्परता ने अपराधियों के मन में खौफ और आम जनता के मन में खाकी के प्रति विश्वास को और गहरा किया है।
अभियान के दौरान कुछ ऐसे मामले भी सामने आए जिन्होंने पुलिस की त्वरित कार्यप्रणाली को सिद्ध किया। जूटमिल पुलिस ने दो अलग-अलग चुनौतीपूर्ण मामलों में चंद्रपुर और पंजाब के जालंधर से नाबालिग बालिकाओं को सकुशल बरामद कर आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया।
वहीं, कोतवाली पुलिस ने संवेदनशीलता की पराकाष्ठा दिखाते हुए डभरा से एक 13 वर्षीय बालिका को महज 24 घंटे के भीतर ढूंढ निकाला, जिसे शादी का झांसा देकर अगवा किया गया था। इसी तरह पूंजीपथरा पुलिस ने अंबिकापुर में दबिश देकर एक 15 वर्षीय बालिका को आरोपी के चंगुल से छुड़ाया।
इन सभी मामलों में आरोपियों के विरुद्ध पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेजा गया, जो समाज के लिए एक कड़ा संदेश है कि बच्चों के साथ किसी भी प्रकार की ज्यादती को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस शानदार सफलता पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए एसएसपी शशि मोहन सिंह ने स्पष्ट संदेश दिया है कि गुमशुदा नाबालिगों और महिलाओं की सुरक्षा रायगढ़ पुलिस की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पुलिस की टीमें भविष्य में भी इसी तत्परता से कार्य करती रहेंगी, लेकिन इसके साथ ही समाज और अभिभावकों को भी अपने बच्चों के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता है।
एसएसपी ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों और उनके सोशल सर्कल पर नजर रखें ताकि किसी भी अनहोनी को समय रहते रोका जा सके। “ऑपरेशन तलाश” की यह सफलता केवल पुलिस की जीत नहीं है, बल्कि उन सैकड़ों मांओं के आंसुओं के थमने की कहानी है जिनके बच्चे आज सुरक्षित उनकी गोद में लौट आए हैं।

