प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना एक ऐसी योजना जिसके तहत 500 आबादी वाले गांव और पहाड़ी क्षेत्र में 250 आबादी वाले गांव में सड़क का निर्माण होना तय हुआ था इसकी शुरुआत 25 दिसंबर सन् 2000 में हुई थी, और इस सड़क पर 12 टन से अधिक वजन वाले गाड़ियों का आना प्रतिबंध है,लेकिन सरगुजा में इन दिनों इन नियम मानकों का मजाक बनाते हुए 15 टन की हाइवा वाहन और उसमें लोड 30 टन चावल यानि कि 45 टन की गाड़िया इस रोड से डेली आना जाना कर रही है।
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनी इस रोड में ठाकुर पुर, विशनपुर खुर्द जैसे जिले के कई गांव शामिल है इस सड़क का निर्माण इन गांव के लोगों के लिए और आस पास के गांव को इन गांव के माध्यम से शहर से जुड़ने के लिए बनाया गया। लेकिन लगभग पिछले 2 साल से इस रोड पर ग्रामीणों का आना जाना कम इन हाइवा गाड़ियों का परिचालन ज्यादा हो रहा है नतीजा सड़क की हालत बत से बतर हो गई है।
कल शाम को यानी शनिवार को इस रोड पर लंबी जाम लगी थी जाम लगने की वजह थी एक हाइवा वाहन जो कि भारतीय खाद्य निगम यानि FCI गोदाम से चावल लोड कर रैक पॉइंट तक जा रही थी बीच रोड में हाइवा धस गया जिसकी वजह से बस इस सड़क पर जाम नहीं बल्कि अंबिकापुर मनेंद्रगढ़ NH 43 रोड के माखन बिहार तक लंबी जाम लग गई यातयात व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई ।
जिस सड़क को ग्रामीणों के आने जाने के लिए बनाया गया था वहां इस तरह के बड़े हाइवा वाहन के चलने से सड़क की दूर दशा ऐसी हो गई है कि इस रोड पर गाड़ी से चलना तो दूर पैदल चलना भी अब ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बन गया है
आस पास के ग्रामीणों से जब हमारी टीम की बात चित हुई तो उनका कहना है इस रोड पर भारतीय खाद्य निगम यानि FCI के 100 गाड़िया डेली 45 टन वजन वाली वाहन पार होती
इस तरह के मामूली सड़क जिसे बस बाइक, कार और पैदल चलने के लिए बनाया गया हो उस पर अगर इस तरह के बड़े वाहन पार होंगे तो आप खुद सड़क की क्या हालत होगी अंदाजा लगा सकते है।
अब तक न इसपर जिला प्रशासन की नजर पड़ी न किसी जिम्मेदार अधिकारी ने इसकी सूद ली आखिर लेंगे भी कैसे नेताओं से इनको फुर्सत मिले तब न आम जनता के परेशानियों को समझेंगे एक तरफ जहां अंबिकापुर की सड़के तमाशा का पात्र बना हुआ है वही जहां सड़क थोड़ी बहुत बेहतर है वहां को भी इन लोगों ने बर्बाद करने से पीछे नहीं हट रहे है।

