अंबिकापुर: सरगुजा संभाग में कानून व्यवस्था को लेकर हालात बिल्कुल भी ठीक नहीं है। पिछले कुछ समय से सरगुजा में परिस्थितियां पुलिस के विपरीत नज़र आ रही है। बिड़गी हुई कानून व्यवस्था को देखते हुए सरकार ने सख़्त कदम उठाया है। सरगुजा रेंज आईजी अंकित गर्ग को हटा कर PHQ भेज दिया गया है। वही IPS दीपक झा को सरकार ने सरगुजा रेंज की कमान सौंपी है।

IPS अधिकारियों के तबादले की सूची रविवार दोपहर जारी हुई। जैसे ही तबादला सूची आई एक नाम को लेकर पुलिस महकमे में काफी चर्चा हुई वो नाम था “अंकित गर्ग” पुलिस महकमे से आवाज़ आई बड़े साहब तो नप गए लेकिन साहब के सबसे वफादार “आँख, कान और दिमाग” का क्या होगा वो भी नपेंगे क्या?
अब आप सोच रहे होंगे की ये आईजी का आँख, कान और दिमाग कौन था। दरअसल सरगुजा के पुलिस महकमे में इस बात की चर्चा खूब थी कि बड़े साहब तो सिर्फ रेंज की गद्दी पर बैठे है, असल आईजी साहब तो साहब के रीडर ASI “सुभाष ठाकुर” है। सुभाष ठाकुर ने ही सरगुजा रेंज की कमान संभाल रखी है। ASI सुभाष ठाकुर जो कहते IPS अंकित गर्ग वो करते थे वो चाहे मामला कितना भी गंभीर क्यों न हो। इसी लिए सुभाष ठाकुर को रेंज आईजी अंकित गर्ग का आँख, कान और दिमाग कहा जाता था।

यही नहीं चर्चा इस बात की भी खूब हुई कि सुभाष ठाकुर जिस पुलिसकर्मी को चाहता चुटकियों में उसे थाना और जिले से नपवा देता था। इतना ही नही जिस पुलिसकर्मी के सिर पर हाथ रख देता मजाल है कि पुलिस कप्तान उस पुलिसकर्मी का कुछ बिगाड़ पाते। इसका उदहारण हालिया दिनों में अंबिकापुर में घटी एक घटना के दौरान भी देखने को मिला था। बड़े-बड़े दिग्गज नेता और जनप्रतिनिधि भी मिलर कोतवाली में पदस्थ प्रधान आरक्षक को लाइन अटैच तो दूर तबादला तक नही करा सके थे। कहा जाता है कि उस प्रधान आराधक को बचाने में सुभाष ठाकुर का ही हाथ था।
सूत्र कहते है कि इस घटन के बाद सरकार और संगठन से जुड़े लोगों में काफी नाराजगी थी। इस मामले के बाद IPS अंकित गर्ग और उनके रीडर ASI सुभाष ठाकुर की शिकायत सरकार से की थी। साथ ही उसके कारनामें का बखान करते हुए सरगुजा रेंज आईजी के पद से IPS अंकित गर्ग को हटाने की मांग की गई थी। ऐसे ही हुआ और सरकार ने अंकित गर्ग को वापस PHQ भेज दिया।
वही अब पुलिस महकमे और राजनीति से जुड़े लोगों में चर्चा है कि सरगुजा आईजी अंकित गर्ग को हटाये जाने के बाद क्या आईजी के रीडर ASI सुभाष ठाकुर पर भी विभागीय गाज गिरेगी? क्यों कि इनके कारनामे के किस्से भी खूब सुनाई दे रहे है। अब कहा ये भी जा रहा है कि बड़े साहब तो गए क्या छोटे साहब भी नपेंगे।
बहरहाल सरगुजा में बिगड़ी कानून व्यवस्था को दुरुस्त करना है तो पुलिस विभाग ने जिम्मेदार अधिकारियों को पहले अपने विभाग में कसावट लाना पड़ेगा। तब जाकर जनता और पुलिस के बीच सामंजस्य स्थापित हो सकेगा साथ ही अपराधियों और अपराध पर लगाम लगेगा।

