सरगुजा। जिले में अधिवक्ता संघ ने एक बड़ा फैसला ले लिया है। गांधीनगर थाना क्षेत्र में हुए एक मारपीट मामले में प्रधान आरक्षक संतोष कश्यप की ओर से पैरवी कर रहे वकील के खिलाफ अधिवक्ता संघ ने एक आदेश जारी किया है। संघ ने साफ कहा है कि जो भी अधिवक्ता इस केस में आरक्षक का पक्ष लेगा, उसकी सदस्यता समाप्त कर दी जाएगी।
आरक्षक की शुरू से अंतिम तक करेंगे पैरवी
जिला अधिवक्ता संघ ने अपने आंतरिक नियमों के नाम पर आम सभा में प्रस्ताव पारित किया कि प्रधान आरक्षक संतोष कश्यप की ओर से कोई भी वकील पैरवी न करे। इसके बावजूद जब जिला न्यायालय के अधिवक्ता अरुण वर्मा ने इस केस को लड़ने का फैसला किया, तो बार एसोसिएशन ने उन्हें नोटिस जारी कर दिया। नोटिस में कहा गया कि संघ के निर्णय के खिलाफ जाकर आरक्षक की तरफ से पैरवी की गई, इसलिए बताएं कि उनकी सदस्यता समाप्त क्यों न की जाए। जिसके जवाब में अधिवक्ता अरुण वर्मा कहा है कि आरक्षक संतोष कश्यप की पैरवी शुरू से लेकर अंत तक करने की बात कही है।

सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश
जिला अधिवक्ता संघ के द्वारा लिए गया फैसला संविधान और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के विरुद्ध जाता है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि कोई भी बार एसोसिएशन किसी वकील को किसी आरोपी या पीड़ित की पैरवी करने से नहीं रोक सकता। इस तरह का कोई भी फरमान न केवल अवैध है, बल्कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता में दखल भी माना जाता है। कोर्ट ने ऐसे मामलों में इसे सीधी अवमानना की श्रेणी में रखा है।
क्या था विवाद
15 नवंबर की रात करीब 11 बजे अंबिकापुर के गांधीनगर थाना क्षेत्र में अधिवक्ता राजेश तिवारी के बेटे राहुल तिवारी की गाड़ी, प्रधान आरक्षक संतोष कश्यप की कार से टकरा गई। मामला इतना बढ़ा कि मारपीट तक नौबत आ गई।आरक्षक संतोष कश्यप का आरोप है कि राहुल तिवारी ने गाली-गलौज की और थप्पड़ भी मारा। वहीं अधिवक्ता राजेश तिवारी की तरफ से भी शिकायत दर्ज कराई गई है। पुलिस ने वकील की शिकायत पर केस दर्ज कर लिया, लेकिन आरक्षक की FIR अभी दर्ज नहीं हुई। जब शिकायत का निपटारा नहीं हुआ तो आरक्षक कोर्ट पहुंचे। यहीं से मामला तूल पकड़ा और अब अधिवक्ता संघ उनके खिलाफ हो गया है।

