अंबिकापुर, छत्तीसगढ़। सरगुजा संभाग का मुख्यालय अंबिकापुर आज भी जर्जर सड़कों की मार झेल रहा है। शहर को जोड़ने वाले तीनों राष्ट्रीय राजमार्गों की हालत बद से बदतर हो चुकी है। जनता से लेकर मीडिया तक ने बार-बार सड़क सुधार की आवाज उठाई, विरोध-प्रदर्शन हुए, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। सरकार और विभाग की ओर से हर बार यही आश्वासन दिया गया कि बरसात के बाद मरम्मत होगी, मगर बरसात बीत गई और सड़कें अब भी गड्ढों में तब्दील हैं।
हाल ही में अंबिकापुर-रामानुजगंज एनएच 343 मार्ग पर शहर से लगे टर्निंग पॉइंट के पास गहरे गड्ढे की वजह से एक पिकअप वाहन पलट गया। गनीमत रही कि चालक और उसमें सवार अन्य लोग बाल-बाल बच गए। पुलिस और स्थानीय लोगों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर पिकअप को सीधा कर रास्ता साफ कराया। लेकिन यह घटना कोई पहली नहीं है। आए दिन इसी तरह की दुर्घटनाएं घट रही हैं।
जर्जर सड़कों की वजह से लोगों को रोजाना जाम, दुर्घटनाओं और असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। खासकर दोपहिया वाहन चालक और स्कूली बच्चे सबसे ज्यादा परेशानी झेल रहे हैं। कई जगह तो सड़क की हालत इतनी खराब है कि गड्ढों और सड़क में फर्क करना मुश्किल हो गया है। इन हालातों में शहरवासी अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
जनता का कहना है कि सरकार और प्रशासन केवल आश्वासन देकर अपनी जिम्मेदारी से बच रहा है। सड़कें मौत का जाल बन चुकी हैं और रोजाना लोग अपनी जान जोखिम में डालकर इन रास्तों से गुजरने को मजबूर हैं। सवाल यह है कि आखिर कब तक अंबिकापुर की सड़कों की मरम्मत सिर्फ फाइलों और बयानों में ही होती रहेगी और कब तक लोग इन गड्ढों से भरी सड़कों पर अपनी जान दांव पर लगाते रहेंगे।

