शनिवार को अंबिकापुर में आई हल्की आंधी और बारिश ने बिजली विभाग की तैयारियों की सच्चाई सबके सामने ला दी। चंद घंटों की तेज हवा और बूंदाबांदी के बाद शहर की बिजली करीब 11 घंटे तक गुल रही। हैरानी की बात ये है कि ये कोई बड़ी प्राकृतिक आपदा नहीं थी—न कोई बड़ा तूफान, न मूसलधार बारिश—फिर भी पूरा शहर अंधेरे में डूबा रहा।
सवाल ये है कि क्या बिजली विभाग ऐसी आम मौसमी स्थितियों के लिए भी तैयार नहीं रहता? क्या हर बार थोड़ी सी बारिश और हवा में शहर की बिजली व्यवस्था चरमरा जाएगी? लोगों के मोबाइल की बैटरी खत्म, इन्वर्टर जवाब दे गए और कई जरूरी काम ठप हो गए। गर्मी में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
बिजली विभाग का काम सिर्फ बिजली पहुंचाना नहीं है, बल्कि ये सुनिश्चित करना भी है कि मौसम के मामूली उतार-चढ़ाव में भी सेवाएं बाधित न हों। लेकिन अंबिकापुर की स्थिति देखकर लगता है कि व्यवस्था जैसे-तैसे ही चल रही है। कोई ठोस प्लानिंग नहीं, कोई बैकअप व्यवस्था नहीं।
हर बार की तरह इस बार भी बिजली गुल होने के बाद न कोई स्पष्ट सूचना दी गई, न यह बताया गया कि कितनी देर में बिजली वापस आएगी। आम जनता एक बार फिर सिस्टम की लापरवाही का शिकार बनी।
अब सवाल उठता है—क्या हम हर बार ऐसे ही अंधेरे में पड़े रहेंगे? या फिर कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे ताकि आने वाले समय में कुछ घंटों की हवा और बारिश हमारे जीवन को ठप न कर दें?

