सरगुजा, छत्तीसगढ़। अंबिकापुर के गांधीनगर क्षेत्र में एक फाइनेंस कंपनी से जुड़ा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ग्राहकों से वसूली गई वाहनों की किश्त की रकम को हड़पने का आरोप सामने आया है। इस पूरे घटनाक्रम में लगभग 3 लाख 50 हजार रुपये से अधिक की राशि के गबन की पुष्टि हुई है, जिसने फाइनेंस व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, एक निजी फाइनेंस कंपनी की शाखा में कार्यरत कर्मचारी ने ग्राहकों से वाहनों की बकाया किश्तें वसूलने के नाम पर रकम सीधे अपने निजी बैंक खाते में जमा करवाई। इतना ही नहीं, ग्राहकों को भरोसा दिलाने के लिए उन्हें कंपनी के प्रिंटेड फॉर्म पर हस्तलिखित रसीदें थमा दी गईं, जबकि कंपनी द्वारा सामान्यतः कंप्यूटराइज्ड पावती जारी की जाती है। इस फर्जीवाड़े के चलते ग्राहकों द्वारा जमा की गई राशि उनके लोन खातों में दर्ज ही नहीं हुई।
मामले में यह भी सामने आया कि कुछ ग्राहकों से नकद डाउन पेमेंट लेकर फर्जी दस्तावेजों के जरिए वाहन उपलब्ध कराए गए। इस पूरी प्रक्रिया में दस्तावेजों की हेराफेरी और नियमों की अनदेखी की गई, जिससे धोखाधड़ी का दायरा और बड़ा हो गया।
शिकायत के आधार पर मामला दर्ज होने के बाद आरोपी की तलाश शुरू हुई। जांच के दौरान तकनीकी जानकारी के आधार पर उसकी लोकेशन का पता लगाया गया और अंततः उसे महासमुंद से पकड़ा गया। पूछताछ में आरोपी ने लाखों रुपये की रकम अपने पास रखने की बात स्वीकार की है।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई वाहनों से जुड़े दस्तावेज और फाइनेंस रिकॉर्ड संदिग्ध स्थिति में हैं, जिनकी गहन जांच जारी है। मामले में और भी तथ्यों के सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आम लोग जिन वित्तीय संस्थाओं पर भरोसा कर अपने सपनों का वाहन खरीदते हैं, वहां आंतरिक निगरानी कितनी मजबूत है। फिलहाल आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया है और मामले की आगे की कार्रवाई जारी है।

