सरगुजा, छत्तीसगढ़। अंबिकापुर में पर्यावरण संरक्षण और जलस्रोतों को बचाने की बात अक्सर मंचों पर सुनाई देती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। नगर निगम क्षेत्र के तालाब अब कथित तौर पर भू-माफियाओं के निशाने पर हैं, जहां एक के बाद एक जलस्रोतों को मिट्टी डालकर खत्म करने की कोशिशें सामने आ रही हैं।

हाल ही में भातू पारा तालाब के बाद अब बस स्टैंड के पास स्थित ‘रिंग बांध’ पर भी मिट्टी पाटने का काम शुरू होने से विवाद गहरा गया है। इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस पार्षद शुभम जायसवाल ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि शहर के व्यस्त इलाके में इस तरह से रातों-रात तालाबों को पाटना बिना किसी राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण के संभव नहीं है।
शुभम जायसवाल ने सीधे तौर पर अंबिकापुर विधायक और छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री राजेश अग्रवाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस पूरे मामले में मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों की निष्क्रियता और संभावित सांठगांठ के चलते ही इस तरह की अवैध गतिविधियां खुलेआम हो रही हैं।
मामले को लेकर उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। साथ ही सुझाव दिया है कि ‘रिंग बांध’ को संरक्षित करते हुए उसे छठ घाट के रूप में विकसित किया जाए, ताकि न सिर्फ धार्मिक उपयोग बढ़े बल्कि इस जलस्रोत को अतिक्रमण और अवैध पाटने से भी बचाया जा सके।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मुद्दे पर क्या कदम उठाता है, क्योंकि एक तरफ जलसंकट की चिंता है, तो दूसरी तरफ शहर के तालाबों का अस्तित्व ही खतरे में नजर आ रहा है।

