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बतौली, छत्तीसगढ़। डीलिस्टिंग के अहम मुद्दे को लेकर जनजाति समाज राष्ट्रीय स्तर पर निर्णायक संघर्ष की तैयारी में जुट गया है। इसी क्रम में जनजाति सुरक्षा मंच बतौली खंड द्वारा एक दिवसीय डीलिस्टिंग कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जनजाति समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करते हुए आगामी डीलिस्टिंग गर्जना महारैली को लेकर रणनीति तय करना रहा, जो दिल्ली में आयोजित की जाएगी।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मंच के जशपुर प्रांत सह संयोजक इन्दर भगत ने कहा कि डीलिस्टिंग का विषय केवल एक मांग नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के अस्तित्व, अधिकार और पहचान से जुड़ा प्रश्न है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन की सफलता के लिए समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है।
कार्यशाला में महारैली की रूपरेखा, यात्रा व्यवस्था, प्रचार-प्रसार, जनसंपर्क अभियान और अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित करने जैसे बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा हुई। पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को ग्राम स्तर तक संपर्क कर समाज को जागरूक करने और बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
जिला संयोजक बिहारीलाल उरांव ने बताया कि डीलिस्टिंग का मुद्दा सबसे पहले सांसद कार्तिक उरांव द्वारा उठाया गया था, जिसे बाद में जनजाति सुरक्षा मंच ने सड़क से लेकर संसद तक मजबूती से उठाया। उन्होंने कहा कि संगठन इस अभियान को उसके लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
संरक्षक देवनाथ पैंकरा ने समाज से एकजुट होकर महारैली में भाग लेने का आह्वान करते हुए कहा कि समाज की एकता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। संरक्षक जवाहर खलखो ने भी अपने संबोधन में महारैली को ऐतिहासिक बनाने की अपील की।
कार्यशाला का संचालन रज्जू राम ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन संयोजक कलमू लड़का ने किया। इस अवसर पर राजेंद्र पैकरा, श्रीराम भगत, राम कैलाश पैकरा, आदिया राम, करमचंद सिंह, सबल साय, बिंदेश्वर भगत, ढोलाराम विनोद पैंकरा, दीपक, सुपारस, जयकरण सिंह, पुरुषोत्तम सिंह, विष्णु गुप्त, श्रवण कुमार, पारस सचिन भगत, रामबिहारी पैकरा, मनोज, विकाश लकड़ा, अभय प्रकाश, रामदेव पैकरा, भारत राम, सुरेंद्र कुमार, निरंजन मिंज, गणेश राम, सी एल उइके, अमृत राम, संदीप लकड़ा, चंदर लाल मिंज, सतानंद, पूनमचंद सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

