अम्बिकापुर | सरगुजा जिले के लुण्ड्रा थाने में पदस्थ आरक्षक अमित रजवाड़े द्वारा सेवा से त्यागपत्र देने की खबर ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। आरक्षक ने अपने त्यागपत्र में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया है कि वह विभागीय उत्पीड़न का शिकार हुआ और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
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आरक्षक अमित रजवाड़े का आरोप है कि उन्होंने लुण्ड्रा क्षेत्र में हो रही लगातार चोरी की घटनाओं की शिकायतें दर्ज कराने के लिए कई बार प्रयास किया, लेकिन उनकी बात को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने बताया कि इन घटनाओं की जानकारी उन्होंने न केवल थाने में दी बल्कि आईजी और एसपी को भी अवगत कराया था, परंतु कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
सबसे गंभीर आरोप उन्होंने आईजी कार्यालय में पदस्थ स्टेनो पुष्पेंद्र शर्मा पर लगाया है। आरक्षक का कहना है कि शिकायतों के बाद से स्टेनो द्वारा उन्हें लगातार धमकाया जा रहा था। मामला तब और बिगड़ा जब उन्हें बिना कारण लुण्ड्रा से बलरामपुर जिले में ट्रांसफर कर दिया गया।

अमित रजवाड़े का त्यागपत्र इस समय सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट तौर पर लिखा है कि वे मानसिक दबाव और अन्यायपूर्ण व्यवहार के चलते अब सेवा जारी नहीं रख सकते।इस घटनाक्रम के बाद आईजी कार्यालय की कार्यशैली और ट्रांसफर नीति पर कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। पुलिस विभाग के अंदरखाने से जुड़ी यह घटना अब जनचर्चा का विषय बन गई है।
हालांकि, इस पूरे प्रकरण पर अब तक आईजी या एसपी कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। पीड़ित आरक्षक का त्यागपत्र सामने आने के बाद मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी जोर पकड़ रही है।

