अम्बिकापुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अम्बिकापुर दौरे के दौरान भाजपा के महापौर प्रत्याशी मंजूषा भगत के समर्थन में भव्य रोड शो और आमसभा आयोजित की गई। लेकिन इस कार्यक्रम के खत्म होने के बाद शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई। घड़ी चौक के नजदीक बना टेंट सुबह 9 बजे तक भी नहीं हटाया गया, जिससे पूरा शहर ट्रैफिक व्यवस्था की चपेट में आ गया। आम जनता प्रशासन हुई, लेकिन ट्रैफिक पुलिस नदारद थी।
पांच घंटे बाद भी नहीं हटा टेंट, जनता की बढ़ी परेशानी
मुख्यमंत्री की सभा शाम 5 बजे समाप्त हो गई थी, लेकिन रात 10 बजे तक भी घड़ी चौक पर बने टेंट को हटाने की प्रक्रिया सुस्त गति से चल रही थी। पड़ताल न्यूज़ की टीम जब मौके पर पहुंची तो टेंट के कर्मचारियों ने बताया कि इसे हटाने में और दो घंटे लगेंगे। यानी कि रात 12 बजे तक भी अम्बिकापुर की मुख्य सड़क पर टेंट लगा रहा और सुबह 9 बजे यही हालत बने हुए है। टेंट के सामान सड़क पर ही मौजूद है।
ट्रैफिक का हाल इतना खराब था कि एंबुलेंस, दोपहिया, चारपहिया वाहन, सबको सिर्फ एक ही लेन से निकलना पड़ा। यह नजारा साफ दिखा रहा था कि अम्बिकापुर की ट्रैफिक व्यवस्था सिर्फ वीआईपी मूवमेंट तक ही सीमित है, आम जनता की परेशानी से किसी को फर्क नहीं पड़ता।
ट्रैफिक पुलिस नदारद! क्या सिर्फ वीआईपी सुरक्षा तक सीमित है जिम्मेदारी?
जाम लगने के बावजूद ट्रैफिक पुलिस मौके से गायब थी। किसी ने ट्रैफिक संभालने की जहमत नहीं उठाई, न ही किसी ने टेंट हटाने में तेजी लाने के लिए कोई कदम उठाया। क्या ट्रैफिक पुलिस का काम सिर्फ वीआईपी काफिले को निकालना है? जब आम जनता को परेशानी हो रही थी, तब ट्रैफिक पुलिस को इसकी सुध क्यों नहीं थी?
शहर में जब कोई बड़ा नेता आता है, तो रोड बंद करने और गाड़ियों को डायवर्ट करने में पुलिस को मिनट नहीं लगते, लेकिन जब जनता को राहत देने की बात आती है, तो वही पुलिस नदारद रहती है।
प्रशासन कब लेगा सबक? जाम से निपटने की कोई रणनीति क्यों नहीं?
अम्बिकापुर में अक्सर बड़े आयोजन होते हैं, लेकिन प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस के पास अब तक कोई ठोस प्लान नहीं है कि ऐसे आयोजनों के बाद शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को सामान्य कैसे किया जाए।
इस संबंध सरगुजा कांग्रेस जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता ने कहा कि, नेशनल हाइवे 43 को जाम करना कतई उचित नहीं है। इसके लिए ट्रैफिक व्यवस्थापक जिम्मेदार है। शासन सत्ता का कैसे दुरूपयोग किया जाता है यहां देखा जा सकता है।
जरूरी सवाल?
– जब सीएम की सभा खत्म हो चुकी थी, तब टेंट समय पर क्यों नहीं हटाया गया?
– क्या ट्रैफिक पुलिस सिर्फ नेताओं की सुरक्षा तक सीमित रह गई है?
– आम जनता की तकलीफ को प्राथमिकता कब दी जाएगी?

