सरगुजा। छत्तीसगढ़ में आदिवासी और वनवासी शब्द को लेकर सियासत गरमाती नजर आ रही है। एक ओर भारतीय जनता पार्टी की ओर से आदिवासी समाज के लिए ‘वनवासी’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर चर्चा है, वहीं कांग्रेस इसे आदिवासी अस्मिता और पहचान से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साध रही है।
9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर प्रदेशभर में आदिवासी समाज द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। अंबिकापुर में भी आदिवासी समाज के अध्यक्ष, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में समाज के लोग कार्यक्रमों में शामिल हुए। हालांकि कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि राज्य सरकार की ओर से विश्व आदिवासी दिवस को बड़े सरकारी आयोजन के रूप में नहीं मनाया गया और सरकार के मंत्री व विधायक भी आदिवासी समाज के कार्यक्रमों में नजर नहीं आए।
इसी मुद्दे को लेकर अंबिकापुर स्थित राजीव भवन में पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने मौजूदा भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आदिवासी समाज को लेकर राजनीति कर रही है। ‘वोट बैंक के लिए आदिवासियों का इस्तेमाल’ का आरोप पूर्व मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा कि एक ओर चुनाव के दौरान आदिवासी समाज के वोट का इस्तेमाल कर सत्ता हासिल की जाती है, वहीं दूसरी ओर आदिवासियों को ‘वनवासी’ बताने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी अलग पहचान, संस्कृति और परंपराएं हैं, ऐसे में उनकी पहचान को बदलने या अलग नाम से संबोधित करने का प्रयास उचित नहीं है। टेकाम स्वयं भी आदिवासी समाज से आते हैं। ऐसे में उनके बयान को छत्तीसगढ़ की आदिवासी राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर उठे इस राजनीतिक विवाद के बीच अब सवाल यह है कि आदिवासी समाज इस मुद्दे को लेकर आने वाले दिनों में क्या रुख अपनाता है। ‘आदिवासी’ और ‘वनवासी’ शब्द को लेकर छत्तीसगढ़ में शुरू हुई राजनीतिक बहस आने वाले समय में ख़ासा असर देखने को मिलेगा। हालांकि इस पूरे मामले में भाजपा या सरकार चुप्पी साधे हुए हैं।

