सरगुजा: अंबिकापुर में मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के आयोजन में एक आमंत्रण कार्ड ने राजनीतिक गुटबाजी को और हवा दे दी है। जिससे जिला प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं।


मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत होने वाले एक आयोजन के लिए प्रशासन ने पहले आमंत्रण कार्ड छपवाया, जिसमें युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर का नाम प्रमुखता से ऊपर रखा गया था। यह कार्ड सभी अतिथियों और संबंधित लोगों को भेजा गया। लेकिन इसके बाद अचानक प्रशासन ने दूसरा कार्ड छपवाया, जिसमें गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंह का नाम ऊपर कर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, पहले कार्ड को लेकर कुछ नेताओं के बीच असंतोष उभरा, जिसके बाद आनन-फानन में जिला प्रशासन ने दूसरा कार्ड छपवाकर उसे भी वितरित किया गया।
इस घटनाक्रम ने स्थानीय स्तर पर सत्ताधारी दल के भीतर गुटबाजी की खबरों को और बल दिया है। लोग इसे विश्व विजय सिंह तोमर और अनुराग सिंह के समर्थकों के बीच वर्चस्व की लड़ाई के रूप में देख रहे हैं। स्थानीय निवासी और राजनीतिक विश्लेषक इसे निगम-मंडल नियुक्तियों के बाद उभरे तनाव से जोड़कर देख रहे हैं।
मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना, जिसका उद्देश्य बुजुर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को तीर्थ यात्रा का अवसर प्रदान करना है। इस बार सियासी विवादों में उलझती नजर आ रही है। इस पूरे मामले को लेकर जिला प्रशासन का पक्ष भी सामने आया है। इधर जिले के कलेक्टर विलास भोसकर ने कहा कि समाज कल्याण विभाग के द्वारा आमंत्रण कार्ड छपवाया गया था। इस बारे में मुझे कुछ जानकारी नहीं होने की बात कही। जिसके बाद समाज कल्याण विभाग के अधिकारी डॉ स्वेच्छा सिंह को कॉल पर पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन नही उठाया गया। लेकिन इससे साफ हो गया कि आमंत्रण कार्ड में बदलाव का फैसला जल्दबाजी में लिया गया। जिससे प्रशासन की किरकिरी हो रही है।
वहीं इस मामले पर न तो विश्व विजय सिंह तोमर और न ही अनुराग सिंह की ओर से कोई आधिकारिक बयान आया है। लेकिन कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा है कि यह मामला केवल कार्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय नेतृत्व और प्रभाव को लेकर चल रही खींचतान का हिस्सा है।
निगम-मंडल नियुक्तियों के बाद पहले से ही छत्तीसगढ़ की राजनीति में उथल-पुथल मची हुई है। कई नेताओं को महत्वपूर्ण पद मिलने से जहां कुछ खेमे उत्साहित हैं, वहीं कुछ असंतुष्ट नेताओं के समर्थक खुलकर नाराजगी जता रहे हैं। इस बीच आमंत्रण कार्ड विवाद ने सत्ताधारी दल के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है।

